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महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना में हलचल: सांसदों की अनुपस्थिति से बढ़ी अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय बैठक में केवल तीन सांसदों की उपस्थिति ने नई अटकलों को जन्म दिया है। अनुपस्थित सांसदों के एकनाथ शिंदे के गुट से जुड़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी नेतृत्व ने अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजने की तैयारी की है। इस घटनाक्रम के चलते शिवसेना में एक और विभाजन की संभावना जताई जा रही है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की पूरी कहानी।
 

शिवसेना में नई हलचल


महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर शिवसेना के मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के केवल तीन लोकसभा सांसद उपस्थित रहे, जबकि छह सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया है। यह माना जा रहा है कि अनुपस्थित सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के संपर्क में हो सकते हैं, लेकिन इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


बैठक में अनुपस्थिति से बढ़ी चिंताएं

दिल्ली में हुई इस बैठक में केवल अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। वहीं, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल बैठक में नहीं पहुंचे। इस अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या शिवसेना (यूबीटी) एक और विभाजन की ओर बढ़ रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी पहले ही एक बड़े टूट का सामना कर चुकी है।


पार्टी नेतृत्व की कार्रवाई की तैयारी

शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य सचेतक अनिल देसाई ने संकेत दिया है कि अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि बैठक के लिए व्हिप जारी किया गया था, फिर भी सांसदों ने न तो भाग लिया और न ही कोई स्पष्ट कारण बताया। पार्टी अब उनसे लिखित जवाब मांगने की योजना बना रही है, जिसे संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।


शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें

शिवसेना के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने दावा किया है कि अनुपस्थित छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया। हालांकि, संबंधित सांसदों या शिंदे गुट की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। फिर भी, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि यह दावा सही साबित होता है, तो लोकसभा में शिंदे गुट की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।


सियासी तल्खी में वृद्धि

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बैठक से अनुपस्थित नेताओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी और उन्हें पार्टी के प्रति वफादार न रहने वाला बताया। दूसरी ओर, शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी बीच, शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर अपने गुट को ही असली संगठन मानने की मांग दोहराई है। आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।