महाराष्ट्र नगर निकाय चुनावों में भाजपा की स्थिति: एक विश्लेषण
भाजपा की जीत और हार का विश्लेषण
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के परिणामों की चर्चा इस तरह की जा रही है जैसे भाजपा ने कोई बड़ी गलती की हो। मुंबई में बहुमत हासिल करने के अलावा, इस चुनाव में कोई विशेष उपलब्धि नहीं है। मुंबई भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, और पहली बार वहां का मेयर बनने का अवसर मिल रहा है। अन्य 28 शहरी निकायों में भी परिणाम लगभग वही हैं जो पिछले चुनाव में थे। 2017 में भी भाजपा ने अधिकांश शहरों में जीत हासिल की थी, जैसे पुणे, ठाणे, कल्याण डोंबिवली, और नागपुर।
इस बार के चुनाव में कुछ स्थानों पर बदलाव देखने को मिला है। जहां पहले भाजपा ने जीत हासिल की थी, वहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की है, और जहां कांग्रेस या एनसीपी ने जीत हासिल की थी, वहां भाजपा ने बाजी मारी है। कुछ नगर निकायों में मामूली फेरबदल के अलावा, अधिकांश परिणाम पिछले चुनावों के समान हैं।
उदाहरण के लिए, भाजपा ने लातूर और चंद्रपुर जैसे नगर निकायों में हार का सामना किया है, जहां वह पहले जीत चुकी थी। भिवंडी में कांग्रेस ने लगातार जीत हासिल की है। कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मिलकर परभणी में भी जीत दर्ज की है। वसई विरार में भी पिछले चुनाव की तरह ही जीत मिली है। मालेगांव में कांग्रेस की हार का कारण एमआईएम की बढ़त है। भाजपा ने नादेंड़, कोल्हापुर और नवी मुंबई में भी अपनी सीटें गंवाई हैं।
संक्षेप में, 2017 में जब देवेंद्र फड़नवीस की सरकार थी, तब भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था, और इस बार भी उसने अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि स्थानीय निकाय चुनावों में वही पार्टी जीतती है, जिसकी सरकार होती है।