महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्त कानून, विधानसभा ने पास किया विधेयक
धर्म की स्वतंत्रता विधेयक-2026 का पारित होना
नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार की रात विधानसभा में 'धर्म की स्वतंत्रता विधेयक-2026' को मंजूरी दी गई, जो जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करता है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जातियों के लोगों की सुरक्षा करना है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी विशेष धर्म को लक्षित नहीं करता, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता है।
धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध घोषित किया गया
इस विधेयक में जबरन, धोखे या प्रलोभन से धर्म परिवर्तन कराने पर सात साल तक की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। विवाह के माध्यम से ऐसा करने वालों को भी समान सजा का सामना करना पड़ेगा। यदि मामला नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ, महिला या अनुसूचित जाति-जनजाति के व्यक्ति का है, तो सजा सात साल और जुर्माना पांच लाख रुपये तक बढ़ जाएगा। सामूहिक धर्मांतरण के लिए भी सात साल की जेल और पांच लाख रुपये का जुर्माना होगा।
बार-बार अपराध करने वालों के लिए सख्त सजा
यदि कोई व्यक्ति या संगठन बार-बार ऐसा अपराध करता है, तो सजा 10 साल तक की कैद और पांच लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि अवैध धर्मांतरण के बाद यदि कोई बच्चा पैदा होता है, तो उसका धर्म उसकी मां के विवाह से पहले के धर्म के अनुसार माना जाएगा। इससे महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
धर्म परिवर्तन की सूचना देना अनिवार्य
धर्म परिवर्तन का इरादा रखने वाले व्यक्तियों को अब 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी। यह कदम पारदर्शिता लाने और जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। विपक्ष ने इस प्रावधान पर सवाल उठाए, लेकिन गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि इसका उद्देश्य स्वतंत्रता छीनना नहीं, बल्कि धोखाधड़ी या जबरदस्ती की जांच करना है।
अन्य राज्यों से प्रेरित, महाराष्ट्र का कानून और सख्त
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में पहले से ऐसे कानून मौजूद हैं। महाराष्ट्र का यह विधेयक उन सभी से अधिक कठोर माना जा रहा है। मत्स्य पालन मंत्री नितेश राणे ने कहा कि यह कानून राज्य में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सबसे प्रभावी होगा। अब विधेयक पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।