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महावीर जयंती 2026: जैन धर्म के पंचशील सिद्धांतों का महत्व

महावीर जयंती 2026 का पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा। भगवान महावीर, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, ने अहिंसा, सत्य, और अन्य पंचशील सिद्धांतों का प्रचार किया। जानें उनके जीवन और सिद्धांतों के बारे में इस लेख में।
 

महावीर जयंती का महत्व


महावीर जयंती 2026: भगवान महावीर, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, ने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन को त्यागकर संन्यास लिया। उन्होंने आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया। महावीर स्वामी ने जैन धर्म के पंचशील सिद्धांतों का प्रचार किया, जिसमें अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) और ब्रह्मचर्य शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने अनेकांतवाद और स्यादवाद जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत भी प्रस्तुत किए। महावीर के सिद्धांतों में किसी भी क्षेत्र, समय या जाति की सीमाएँ नहीं होतीं। जैन मुनि और साध्वी इन सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करते हैं, जबकि श्रावक और श्राविका इन्हें अपने जीवन में अपनाते हैं।


भगवान महावीर का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को हुआ था। इस पावन दिन को जैन समुदाय श्रद्धा और भक्ति के साथ महावीर जयंती के रूप में मनाता है।


महावीर जयंती का पर्व 31 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।


भगवान महावीर की कई प्राचीन प्रतिमाएँ देश-विदेश के संग्रहालयों में देखी जा सकती हैं। महाराष्ट्र के एल्लोरा गुफाओं में और कर्नाटक की बादामी गुफाओं में उनकी प्रतिमाएँ स्थित हैं।


महावीर स्वामी ने 527 ईसा पूर्व, 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी (राजगीर) में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को निर्वाण प्राप्त किया। पावापुरी में एक जल मंदिर है, जिसे महावीर स्वामी के अग्निसंस्कार का स्थल माना जाता है।