☰
×

महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार के बड़े फैसले की तैयारी

भाजपा और केंद्र सरकार अगले दो हफ्तों में महिला आरक्षण और परिसीमन पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की योजना बना रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी में बताया कि सभी विपक्षी दलों से बातचीत की गई है। इस दौरान, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परिसीमन को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। जानें, क्या ये निर्णय भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं और कांग्रेस की स्थिति पर इसका क्या असर होगा।
 

राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना

भाजपा और केंद्र सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि अगले दो हफ्ते भारतीय राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। विजयादशमी के बाद सरकार की राजनीतिक गतिविधियाँ तेज होने की संभावना है। यह संकेत संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजी गई चिट्ठी से मिला है। रीजीजू ने उल्लेख किया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दों पर लगभग सभी विपक्षी दलों से चर्चा की गई है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इन विषयों पर सरकार ने कांग्रेस के साथ कई बार बातचीत की है। इस पत्र का एक संकेत यह है कि सरकार अब प्रदर्शनों से आगे बढ़कर राजनीतिक निर्णय लेने के लिए आत्मविश्वास महसूस कर रही है। कहा जा रहा है कि अगले 15 दिनों में, विजयादशमी के बाद और दिवाली से पहले, कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। सरकार महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन विधेयक को पारित कराने की योजना बना रही है, इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल भी किया जाएगा।


2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मीडिया में यह खबरें आ रही हैं कि 2029 का लोकसभा चुनाव 800 सीटों पर होगा। लेकिन क्या यह संभव है? यह एक बड़ा सवाल है, क्योंकि सरकार की सारी उम्मीदें डीएमके के समर्थन पर निर्भर हैं। हालांकि, डीएमके के समर्थन के बावजूद, कम से कम 20 सीटों की कमी महसूस की जा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से निर्णय लिया है कि वह परिसीमन के लिए तैयार नहीं होगी। कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन उनके राजनीतिक अस्तित्व का अंत होगा। यह बात राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खुलकर कही है।


गहलोत का परिसीमन पर बयान

अशोक गहलोत ने परिसीमन के मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार लोकसभा सीटों को इस तरह से बदलने की कोशिश कर रही है कि भाजपा कभी हार न सके। उन्होंने असम का उदाहरण दिया, जहां भाजपा ने अपने अनुसार परिसीमन कराया और इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस का सफाया हो गया। गहलोत ने कहा कि अगर परिसीमन होता है, तो भारत में भी भाजपा अगले 50 या 100 साल तक सत्ता में बनी रहेगी। सवाल यह है कि अगर कांग्रेस इस रुख को अपनाती है, तो क्या अन्य सहयोगी पार्टियाँ भाजपा के साथ जाने का जोखिम उठाएंगी? यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है। सीटें 543 से बढ़कर 800 हो जाएं, इसमें किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित करने पर भी कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन कांग्रेस को यह चिंता है कि भाजपा के शासन में परिसीमन होने पर, विपक्षी पार्टियों के लिए जीतने का रास्ता बंद हो जाएगा।