महेंद्रगढ़ में सरसों की फसल से किसानों की खुशहाली
सरसों की फसल से किसानों को मिली खुशहाली
नारनौल. दक्षिण हरियाणा के कृषि प्रधान जिले महेंद्रगढ़ में इस बार सरसों की फसल ने किसानों के लिए खुशियों की लहर ला दी है। जिले की प्रमुख अनाज मंडियों, विशेषकर नारनौल में सरसों की आवक तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की तारीख 28 मार्च निर्धारित की है, लेकिन उससे पहले ही मंडियों में तिलहन की बड़ी मात्रा पहुंच रही है।
बाजार भाव MSP से अधिक
बाजार भाव MSP को पार कर रहा है
यह जानकर हैरानी और खुशी होती है कि इस बार किसानों को सरकारी सहायता का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। बाजार में प्राइवेट प्लेयर और एजेंसियां सक्रिय हैं। जहां सरकार ने सरसों का MSP ₹5650 प्रति क्विंटल रखा है, वहीं खुले बाजार में व्यापारी ₹6600 प्रति क्विंटल तक की बोली लगा रहे हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी दर से ₹500 से ₹1000 तक का लाभ है।
मंडी प्रशासन की तैयारियां
मंडी प्रशासन ने की पुख्ता तैयारियां
नारनौल मार्केट कमेटी के सचिव नकुल यादव ने स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि मंडी में फसल लाने वाले किसानों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बिजली, शुद्ध पेयजल और साफ-सुथरे शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का ध्यान इस बात पर है कि 28 मार्च से शुरू होने वाली सरकारी खरीद के दौरान भीड़ प्रबंधन और उठान कार्य सुचारू रहे।
किसानों के लिए सुविधाएं
अटल कैंटीन और हेल्प डेस्क की सुविधा
किसानों की सुविधा के लिए मंडी परिसर में अटल कैंटीन को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया है। यहां किसान बेहद कम खर्च पर पौष्टिक भोजन और चाय-नाश्ता प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, एक समर्पित हेल्प डेस्क भी स्थापित की गई है। सचिव ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी सरसों की फसल को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके लाएं, ताकि उन्हें नमी के आधार पर दाम में कटौती का सामना न करना पड़े और अधिकतम भाव मिल सके।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
महेंद्रगढ़ जिला राजस्थान की सीमा से सटा होने के कारण सरसों की खेती का एक बड़ा केंद्र है। बाजार में ऊंचे दाम मिलने से न केवल किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौटने की उम्मीद है। प्राइवेट एजेंसियों की सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि इस बार सरसों की गुणवत्ता और मांग दोनों ही उच्च स्तर पर हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।