मानसून का कहर: असम और उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित
देशभर में मानसून का प्रभाव बढ़ता जा रहा है
नई दिल्ली: मानसून का असर पूरे देश में तेजी से महसूस किया जा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन ने लोगों के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। असम में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर है, वहीं उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों में कई राज्यों में भारी से अत्यधिक बारिश की चेतावनी जारी की है।
असम में बाढ़ से लाखों प्रभावित
असम में बाढ़ के कारण अब तक 78 लोगों की जान जा चुकी है और तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। कई गांवों में घरों में पानी भर गया है, जबकि सड़कें और संपर्क मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
राज्य सरकार के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में पानी का स्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन भारी नुकसान के कारण लोगों की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। केंद्र की टीम ने प्रभावित जिलों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया है।
उत्तराखंड में भूस्खलन और चारधाम यात्रा पर असर
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हरिद्वार में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है, जबकि रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां चेतावनी स्तर से ऊपर बह रही हैं।
भूस्खलन के कारण राज्य में 109 सड़कें बंद हो गई हैं। कई प्रमुख मार्गों पर मलबा आने से आवाजाही बाधित हुई है। खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है और लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की है।
कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
IMD ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अगले चार दिनों तक तेज बारिश की संभावना जताई है।
असम के कुछ जिलों और उत्तराखंड के बागेश्वर, नैनीताल, चंपावत और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन को राहत और बचाव दलों को पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अगले 96 घंटे महत्वपूर्ण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य भारत में बने गहरे दबाव का क्षेत्र पश्चिमी विक्षोभ से टकराने वाला है, जिससे बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। इसके चलते जलभराव, ट्रैफिक जाम और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ने की आशंका है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और सतर्क रहने की आवश्यकता है।