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मायावती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर दी प्रतिक्रिया, पुलिस कार्रवाई की मांग की

बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कदम पहले उठाया जाना चाहिए था। साथ ही, उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मायावती ने लड़कियों के साथ बदसलूकी करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की अपील की, ताकि उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
 

मायावती की प्रतिक्रिया

बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि यह इस्तीफा पहले लिया जाता तो यह अधिक उचित होता। मायावती ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

बसपा सुप्रीमो ने शनिवार को अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'देश के छात्रों और युवाओं के आंदोलन के कारण केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना उचित है। यदि यह पहले किया जाता तो बेहतर होता।'


पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

उन्होंने आगे कहा, 'हमारी पार्टी केंद्र सरकार से यह अपेक्षा करती है कि जिन पुलिसकर्मियों ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज किया, उन पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।'


लड़कियों के साथ बदसलूकी पर सख्त कार्रवाई

मायावती ने यह भी कहा कि विशेष रूप से जिन पुरुष पुलिसकर्मियों ने लड़कियों के साथ बदसलूकी की, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


एफआईआर वापस लेने की मांग

बसपा सुप्रीमो ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की भी मांग की, ताकि उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा, 'सरकार को आंदोलन कर रहे छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ले लेनी चाहिए, ताकि उन्हें थानों और कोर्ट के चक्कर न काटने पड़े।'


छात्रों के लिए अपील

पूर्व सीएम मायावती ने छात्रों से अपील की कि वे अपने संघर्ष को किसी भी पार्टी द्वारा राजनीतिकरण करने की अनुमति न दें और अपने भविष्य को खराब न होने दें।