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मालदा में विरोध प्रदर्शन: टीएमसी पार्षदों सहित छह पर एफआईआर दर्ज

पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विरोध प्रदर्शन ने गंभीर मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार को फटकार लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले में टीएमसी के दो पार्षदों सहित छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियाँ।
 

पश्चिम बंगाल में बढ़ता विवाद

पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित विरोध प्रदर्शन का मामला गंभीर रूप ले चुका है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां अदालत ने ममता बनर्जी की सरकार को फटकार लगाते हुए जांच के आदेश दिए हैं।


सीईओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

31 मार्च और 1 अप्रैल को सीईओ बंगाल के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ, जिसके चलते कोलकाता पुलिस ने टीएमसी के दो स्थानीय पार्षदों सचिन सिंह और शांति रंजन कुंडू सहित छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। उत्तरी बंगाल के आईजी के अनुसार, अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।


एफआईआर में लगाए गए आरोप

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 31 मार्च और 1 अप्रैल की रात को आरोपी कुछ लोगों के साथ मिलकर हरे स्ट्रीट और स्ट्रैंड रोड चौराहे पर अवैध रूप से एकत्रित हुए। पुलिस ने बार-बार उनसे वहां से जाने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने नहीं माना और अपनी गैर-कानूनी गतिविधियों को जारी रखा।


सार्वजनिक सड़क पर अवरोध

पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि भीड़ ने सार्वजनिक सड़क को आंशिक रूप से रोक दिया, जिससे यातायात में बाधा उत्पन्न हुई। आरोप है कि भीड़ में शामिल लोग सीईओ पश्चिम बंगाल के खिलाफ भड़काऊ नारे भी लगा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में डीएम और एसपी के साथ-साथ राज्य सरकार को भी फटकार लगाई।


न्यायिक अधिकारियों का घेराव

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि मालदा में बुधवार दोपहर से आधी रात तक जो घटनाएं हुईं, वे अत्यंत निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि वहां एसआईआर में लगे सात न्यायिक अधिकारियों का घंटों तक घेराव किया गया, जिससे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।