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मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए 238 एसी ईएमयू रेक का निर्माण शुरू

रेल मंत्रालय ने मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए 238 एसी ईएमयू रेक के निर्माण की योजना की घोषणा की है। यह निर्माण विभिन्न कोच फैक्ट्रियों में होगा, जिसमें 2027 से आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल के महत्व पर जोर दिया है, जो बुनियादी ढांचे के समय पर चालू होने के लिए आवश्यक है। जानें इस योजना के तहत रेकों के निर्माण का विवरण और समयसीमा।
 

रेल मंत्रालय का महत्वपूर्ण निर्णय

रेल मंत्रालय ने मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए 238 एसी ईएमयू रेक की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब इन रेक का निर्माण विभिन्न कोच फैक्ट्रियों में किया जाएगा, जिसमें 2027 से कोचों की आपूर्ति शुरू होने की योजना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस संबंध में जानकारी साझा की।


निर्माण की प्राथमिकताएं

रेल मंत्रालय ने चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री (RCF) और रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) के माध्यम से 238 एसी ईएमयू रेक के निर्माण को प्राथमिकता दी है। यह कदम मुंबई शहरी परिवहन परियोजना (MUTP) के तहत बुनियादी ढांचे के समय पर चालू होने के लिए उठाया गया है।


रेक निर्माण का विवरण

रेल मंत्रालय के अनुसार, चेन्नई आईसीएफ में 120 एसी ईएमयू रेक, कपूरथला आरसीएफ के माध्यम से 71 रेक और रायबरेली की मॉडर्न रेल कोच फैक्ट्री में 47 रेक का निर्माण किया जाएगा। कुल मिलाकर, तीनों कोच फैक्ट्रियां 238 रेक का उत्पादन करेंगी।


आधुनिक ट्रेन निर्माण की क्षमता

भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयों में आधुनिक यात्री रेलगाड़ियों के साथ-साथ वातानुकूलित ईएमयू, वंदे भारत ट्रेनसेट और वंदे मेट्रो ट्रेनसेट के निर्माण की क्षमता है। रेलवे बोर्ड ने एसी ईएमयू रेकों की खरीद को मौजूदा आरडीएसओ/आईसीएफ निर्देशों के अनुसार मंजूरी दे दी है, जिससे रेलगाड़ियों का शीघ्र निर्माण और आपूर्ति सुनिश्चित होगी।


आपूर्ति की समयसीमा

मंत्रालय ने बताया कि रेकों की आपूर्ति 2027 से शुरू करने की योजना है, और सभी रेकों की आपूर्ति 2030 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। 2027 में पहले ट्रेनसेट की आपूर्ति और 2030 तक सभी आवश्यकताओं की पूर्ति से बुनियादी ढांचे के चालू होने और रोलिंग स्टॉक के समावेश के बीच के अंतर को समाप्त करने में मदद मिलेगी। इससे बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग संभव होगा।