मुंबई का विकास: क्या राजनीतिक नेतृत्व ने किया है रुकावट का काम?
मुंबई: विकास की राजनीति का विश्लेषण
मुंबई: पिछले दस वर्षों में मुंबई के विकास पर राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस जारी है। अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि जब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा और महायुति सरकार सत्ता में थी, तब मुंबई ने बुनियादी ढांचे में तेजी से प्रगति की। इसके विपरीत, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं धीमी हो गईं, जिससे शहर का विकास प्रभावित हुआ।
फडणवीस का कार्यकाल: योजनाओं का कार्यान्वयन
2014 से 2019 के बीच देवेंद्र फडणवीस का कार्यकाल मुंबई के बुनियादी ढांचे के विकास का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान कई योजनाएं जो पहले से लंबित थीं, अब क्रियान्वित होती दिखीं। मुंबई मेट्रो का विस्तार, कोस्टल रोड जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (जिसे अब अटल सेतु कहा जाता है) को इस समय में गति मिली। सरकार की प्राथमिकता यातायात की समस्याओं को कम करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था।
एमवीए सरकार: निर्णयों पर विवाद
2019 में सत्ता परिवर्तन के बाद, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में एमवीए सरकार ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स की दिशा में बदलाव किया। मेट्रो-3 के आरे कारशेड से संबंधित निर्णय सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस निर्णय के कारण परियोजना में वर्षों की देरी हुई और लागत में भी वृद्धि हुई। आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार को श्रेय न मिले, इसी कारण से निर्णय बदले गए।
मुंबईवासियों की समस्याएं
इन वर्षों में आम नागरिकों को ट्रैफिक जाम, अधूरे रास्तों और धीमी प्रगति का सामना करना पड़ा। सड़कें खुदी रहीं, लेकिन समाधान दूर दिखा। कोविड-19 के कठिन समय में, जब लोगों को राहत की सबसे ज्यादा आवश्यकता थी, तब कई सरकारी निर्णयों पर सवाल उठे। इस दौरान कुछ घोटालों के आरोप भी सामने आए, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा।
2022 के बाद विकास की नई लहर
2022 में महायुति सरकार की वापसी के साथ, मुंबई में रुकी हुई परियोजनाओं ने फिर से गति पकड़ी। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया गया। वर्षों से लटके प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू हुआ, जिससे मुंबईवासियों को राहत मिली।
अटल सेतु: विकास का प्रतीक
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, जिसे अब अटल सेतु कहा जाता है, महायुति सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। यह देश का सबसे लंबा समुद्री पुल है, जो मुंबई और नवी मुंबई के बीच की दूरी को कम करता है और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है।
कोस्टल रोड और मेट्रो का विस्तार
कोस्टल रोड परियोजना ने दक्षिण मुंबई से वर्ली तक की यात्रा को सरल बना दिया है। वहीं, मेट्रो नेटवर्क के नए रूट्स शहर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही, बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिसे पहले अनावश्यक माना जा रहा था।
भविष्य की दिशा: विकास या ठहराव?
2024 के विधानसभा चुनावों के बाद महायुति सरकार फिर से बनी है। जनता को उम्मीद है कि विकास की यह गति बनी रहेगी। लेकिन चिंता यह है कि यदि वही राजनीतिक सोच फिर से हावी हुई, जो परियोजनाओं को रोकने में विश्वास रखती है, तो मुंबई की प्रगति फिर से रुक सकती है।
निर्णय मुंबईकरों के हाथ में
मुंबई जैसे महानगर को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो निर्णय लेने में देरी न करे और विकास को प्राथमिकता दे। अब सवाल यह है कि क्या शहर को तेज़ विकास चाहिए या बार-बार लगने वाले राजनीतिक 'स्पीड ब्रेकर'? इसका उत्तर आने वाला समय और मुंबईकरों की समझदारी तय करेगी।