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मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर 33 घंटे बाद ट्रैफिक सामान्य हुआ

मुंबई और पुणे के बीच एक्सप्रेसवे पर 33 घंटे के लंबे जाम के बाद ट्रैफिक सामान्य हो गया है। यह जाम एक गैस टैंकर के पलटने के कारण लगा था, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानें इस घटना के पीछे के कारण और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में।
 

ट्रैफिक की बहाली के बाद यात्रियों को मिली राहत


मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करने वाले हजारों लोगों को अंततः 33 घंटे के बाद राहत मिली है। गुरुवार सुबह मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सामान्य ट्रैफिक बहाल कर दिया गया। मंगलवार शाम को खंडाला घाट क्षेत्र में एक गैस टैंकर के पलटने के कारण यह लंबा जाम लग गया था। इस जाम ने यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसमें कई लोग घंटों तक अपनी गाड़ियों में फंसे रहे, जबकि पीने का पानी और शौचालय की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं।


गैस टैंकर के पलटने का कारण

एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम को खंडाला घाट में एक ज्वलनशील गैस से भरा टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक तुरंत रोक दिया गया, और गैस लीक होने की आशंका के चलते बचाव कार्य बहुत सावधानी से किया गया।


टैंकर हटाने में समय क्यों लगा

अधिकारियों के अनुसार, टैंकर में लगभग 21 टन प्रोपलीन गैस भरी हुई थी, जिसे सीधे हटाना खतरनाक हो सकता था। इसलिए पहले गैस को दूसरे टैंकरों में ट्रांसफर किया गया, जिससे प्रक्रिया में समय लगा। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम के एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार रात को गैस को सुरक्षित तरीके से खाली किया गया और फिर भारी क्रेनों की मदद से टैंकर को हटाया गया।


यात्रियों को हुई कठिनाइयाँ

इस लंबे जाम के दौरान, मुंबई और पुणे के बीच लगभग 90 किलोमीटर के रास्ते पर हजारों वाहन फंसे रहे। जाम अपने चरम पर था, जिसमें रुकी हुई गाड़ियों की लाइन लगभग 20 किलोमीटर तक फैली हुई थी। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर स्थिति की तस्वीरें और वीडियो साझा किए। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।


सुरक्षा उपायों के बाद ट्रैफिक बहाल

हाइवे पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गैस कंपनी की टीमों से सुरक्षा का आश्वासन मिलने के बाद ही टैंकर को हटाया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील थी क्योंकि इसमें जानलेवा गैस शामिल थी। टैंकर हटने के बाद एक्सप्रेसवे पर सफाई अभियान भी चलाया गया, जिससे सड़क पर फैले मलबे को हटाया गया और गाड़ियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया गया।