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मुंबई में सुरक्षा में सुधार: बीजेपी की रणनीति का असर

भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 'इंडिया फर्स्ट' और 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत, मुंबईकर अब पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी और मुंबई में आतंकवादी घटनाओं में कमी आई। इसके अलावा, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों और कानून के प्रवर्तन पर भी चर्चा की जाएगी। जानें कि कैसे बीजेपी ने दंगों और अतिक्रमण पर त्वरित कार्रवाई की है और क्या यह वोट बैंक की राजनीति से अलग है।
 

सुरक्षा में सुधार की दिशा में बीजेपी की पहल


भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से 'इंडिया फर्स्ट' और 'आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' की नीति को अपनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप सुरक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। महाराष्ट्र में बीजेपी की एंट्री के बाद, मुंबई, जो भारत की वित्तीय राजधानी है, और भी सुरक्षित हो गई है।


मुंबई के निवासी अब पहले से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पहले यहां अनिश्चितता का माहौल था, लेकिन अब स्थिति में सुधार आया है।


मुंबई में आतंकवादी हमले

2014 से पहले, मुंबई में कई आतंकवादी हमले हुए थे। मुंबईकरों ने सिरियल ट्रेन धमाकों, जवेरी बाजार विस्फोट और 26/11 के हमलों का सामना किया है। चरमपंथियों ने इस शहर को बार-बार निशाना बनाया है, जिससे आम लोगों में घर से बाहर निकलने से पहले डर बना रहता था। लेकिन अब वे खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बीजेपी पर पिछले सरकारों द्वारा नरम नीति अपनाने का आरोप लगाया गया है, जिससे आतंकवादियों को बढ़ावा मिला। लेकिन 2014 के बाद से मुंबई और भी व्यस्त और सुरक्षित हो गया है।


केंद्र सरकार की सुरक्षा प्राथमिकताएँ

केंद्र सरकार ने 2014 के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मुंबई में तटीय निगरानी को मजबूत किया गया है, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार किया गया है, और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर शांति बनी रहती है।


आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ

मुंबई के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक भी रही हैं। अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की बढ़ती संख्या ने जनसांख्यिकीय संतुलन को बिगाड़ने के साथ-साथ अपराध और कट्टरता को बढ़ावा दिया है। भाजपा सरकार ने इनकी पहचान और निर्वासन के लिए अभियान चलाए हैं। अतिक्रमण हटाने के कदमों से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण पाया गया है, जो कानून के शासन को मजबूत करने का प्रमाण है।


कानून का समान प्रवर्तन

प्रतापगढ़ किले के निकट अफजल खान के मकबरे के आसपास अवैध निर्माण लंबे समय से चल रहा था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद, पूर्व सरकारों ने कार्रवाई नहीं की। नवंबर 2022 में शिंदे-फडणवीस सरकार ने धारा 144 लागू कर और भारी सुरक्षा के साथ अवैध ढांचों को ध्वस्त किया। यह कदम कानून के शासन की जीत माना गया और चरमपंथियों को स्पष्ट संदेश दिया।


'बुलडोजर न्याय' का प्रभाव

हाल के वर्षों में भाजपा सरकार ने दंगों और अतिक्रमण पर त्वरित कार्रवाई की है। जनवरी 2024 में अयोध्या राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा से पहले मीरा रोड पर हुई सांप्रदायिक झड़प के बाद आरोपियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया। इसी तरह, माहिम में समुद्र तट पर बनी अनधिकृत दरगाह को भी तुरंत हटाया गया। ये कदम दर्शाते हैं कि अपराधियों को कोई संरक्षण नहीं मिलेगा।


वोट बैंक बनाम सुरक्षा

भाजपा ने महा विकास अघाड़ी (कांग्रेस, एनसीपी-शरद गुट और उद्धव ठाकरे शिवसेना) पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विपक्ष कट्टर तत्वों को बचाने के लिए मानवाधिकार का सहारा लेता है। भाजपा का तर्क है कि ऐसी तुष्टिकरण नीति मुंबई को पुराने अंधेरे दिनों में ले जा सकती है।


आज मुंबई में त्योहार बिना भय के मनाए जाते हैं। आतंकवादी अलर्ट पर एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं। भाजपा का मूल मंत्र है - 'अपराधी का कोई धर्म नहीं, लेकिन अपराध को संरक्षण देना देशद्रोह है।' इस मजबूत रुख से मुंबई अब बिना डर के जीने लगा है।