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मुक्तसर साहिब में माघी मेला: श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हुआ आयोजन

मुक्तसर साहिब में माघी मेला श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गया है। इस अवसर पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे और चालीस मुक्तों की शहादत को याद करेंगे। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पवित्र सरोवर में स्नान कर रही है, जबकि ठंड के बावजूद उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई है। जानें इस ऐतिहासिक मेले के बारे में और भी जानकारी।
 

माघी मेले का शुभारंभ

चंडीगढ़: दशम पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चालीस मुक्तों की शहादत की याद में पवित्र स्थल श्री मुक्तसर साहिब में माघी मेला धूमधाम से आरंभ हो गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और गुरु के चरणों में शीश नवाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बुधवार को इस मेले के अवसर पर श्री मुक्तसर साहिब का दौरा करेंगे। वे पहले गुरुद्वारा श्री टूटी गंढी साहिब में माथा टेकेंगे और फिर एक रैली में शामिल होकर पंजाबवासियों को संबोधित करेंगे।


सीएम मान का संदेश

मुख्यमंत्री मान इस अवसर पर संगतों को माघी मेले और चालीस मुक्तों के बलिदान के महत्व के बारे में जानकारी देंगे। उन्होंने पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने खिदराना ढाब की ऐतिहासिक लड़ाई में शहीद हुए चालीस मुक्तों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, "उन 40 मुक्तों की शहादत को करोड़ों नमन हैं, जिन्होंने धर्म और इंसाफ के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।" सीएम मान ने माघी मेले में शामिल सभी श्रद्धालुओं के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया।


श्रद्धा का माहौल

माघी मेले के चलते श्री मुक्तसर साहिब में श्रद्धा का अद्भुत माहौल बना हुआ है। लोहड़ी की रात से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। सुबह से लेकर दोपहर तक गुरुद्वारा श्री दरबार साहिब में मत्था टेकने और पवित्र सरोवर में स्नान करने का क्रम जारी है। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। तापमान गिरने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर रहे हैं।


माघी मेले का ऐतिहासिक महत्व

यह मेला 1705 में गुरु गोबिंद सिंह जी के लिए लड़ने वाले चाली मुक्तों के बलिदान को याद करने और उनका सम्मान करने के लिए आयोजित किया जाता है। ये शहीद खिदराना के युद्ध में मुगलों के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी।