मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप, दो चुनाव आयुक्तों ने उठाए सवाल
मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठे सवाल
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाताओं के नामों में मनमाने तरीके से बदलाव करने के आरोप लगे हैं। दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बिना किसी पूर्व सूचना के आयोग द्वारा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की शिकायत की है। पिछले 10 महीनों में उन्होंने 14 बार इस मुद्दे को उठाया है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस संबंध में कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन से भी शिकायत की थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्तों ने आयोग के निर्णयों पर 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार आपत्ति जताई। इनमें से एक दिन, 16 अप्रैल, को चार आपत्तियां दर्ज की गईं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गईं।
यह विवाद बिहार में जून 2025 में शुरू हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद उत्पन्न हुआ। इस प्रक्रिया के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। विपक्ष ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना की है।
इसके अलावा, चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए फॉर्म छह में किए गए बदलाव पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह बदलाव 'अवैध और अनधिकृत' है। उनका दावा है कि मतदाता पंजीकरण कानून, 1960 में मनमाने तरीके से बदलाव किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनाव आयुक्त एक अरब मतदाताओं की डाटा सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। उन्होंने चुनाव आयोग की डीजी आईटी सीमा खन्ना के संबंध में भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिले के मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को ईसीआईनेट का उपयोग करने से रोका गया है, जबकि नाम जोड़ने और हटाने का कार्य मूल रूप से जिला स्तर पर होना चाहिए।