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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की माता का अंतिम संस्कार: नेमरा में उमड़ा जनसैलाब

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की माता, रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार नेमरा में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। इस अवसर पर हजारों लोग उपस्थित थे, जिन्होंने भावुकता के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। रूपी सोरेन ने झारखंड आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके निधन से राज्य ने एक मार्गदर्शक को खो दिया है। जानें इस दुखद घटना के बारे में और कैसे लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
 

मुख्यमंत्री की माता का अंतिम संस्कार


मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की पूजनीय माता, रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। यह अंतिम संस्कार रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा के श्मशान घाट पर संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने अपनी माता को मुखाग्नि दी, जिससे वहां उपस्थित हजारों लोगों की आंखों में आंसू आ गए। इस मौके पर माहौल बेहद गमगीन था।


नेमरा में शोक का माहौल

रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर के दर्शन और अंतिम विदाई देने के लिए नेमरा गांव में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दूर से आए सैकड़ों ग्रामीण, समर्थक, राजनीतिक नेता और प्रशासनिक अधिकारी सभी ने अश्रुपूरित आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। शव यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग श्मशान घाट तक पहुंचे। माहौल गमगीन था, लेकिन सभी की इच्छा थी कि वे रूपी सोरेन का अंतिम दर्शन कर सकें। नेमरा गांव के हर घर में अंतिम विदाई का माहौल था, और लोग उनके व्यक्तित्व और कार्यों पर चर्चा कर रहे थे।


सादगी और संघर्ष की प्रतीक

दिवंगत रूपी सोरेन झारखंड आंदोलन के समय से सादगी, त्याग और संघर्ष की प्रतीक रही हैं। उन्होंने न केवल अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारियां निभाई, बल्कि झारखंड समाज के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाई। उनके निधन से झारखंड ने एक ममतामयी मां और मार्गदर्शक को खो दिया है। इस दुखद समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है और दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना की है।