मेरठ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन गैस का रिसाव, कई लोग प्रभावित
मेरठ STP गैस रिसाव की घटना
उत्तर प्रदेश के मेरठ में मंगलवार रात को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से क्लोरीन गैस का रिसाव हुआ, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। यह घटना पल्लवपुरम फेज-2 में रात लगभग 8:30 बजे हुई। गैस के फैलने के बाद स्थानीय निवासियों ने सांस लेने में कठिनाई और आंखों में जलन की शिकायत की। कई लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनकी संख्या लगभग 8 से 15 के बीच बताई जा रही है। जैसे ही गैस रिसाव की सूचना मिली, जिला प्रशासन और पुलिस सक्रिय हो गए। जिलाधिकारी और एसएसपी भी घटनास्थल पर पहुंचे।
आसपास के क्षेत्र को खाली कराया गया
गैस रिसाव के बाद STP के आसपास के घरों को खाली कराया गया। दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और रिसाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राम कृपाल सिंह ने बताया कि रिसाव के बाद चार फायर टेंडर मौके पर तैनात किए गए थे और आसपास के रिहायशी इलाके को सुरक्षित किया गया। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने भी स्थिति नियंत्रण में होने की पुष्टि की। प्रारंभिक रिपोर्ट में वाल्व से रिसाव की बात सामने आई थी, जिसे बंद कर दिया गया।
गैस रिसाव का कारण क्या है?
रिसाव के कारणों की जांच जारी है। STP के सुरक्षा अधिकारी विशाल गुप्ता के अनुसार, प्लांट में पानी के डिसइंफेक्शन के लिए क्लोरीन गैस का उपयोग किया जाता है। उनका कहना है कि क्लोरीन डालने के दौरान टनल पाइप में आवश्यक वॉशर नहीं लगाया गया था। बाद में जांच में वॉशर गायब पाया गया, जिससे गैस बाहर निकलने लगी। चूंकि क्लोरीन गैस हवा से भारी होती है, यह ऊपर की बजाय निचले स्तर पर जमा होती रही। रिसाव को नियंत्रित करने के लिए गैस को पानी के माध्यम से अवशोषित करने की प्रक्रिया अपनाई गई। हालांकि, नगर निगम की प्रारंभिक जानकारी में वाल्व लीकेज को कारण बताया गया है।
STP में क्लोरीन का उपयोग क्यों किया जाता है?
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी को उपचारित कर उसे पुनः उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया के अंतिम चरणों में क्लोरीन जैसे कीटाणुनाशक का उपयोग हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। क्लोरीन नियंत्रित मात्रा में उपयोग किया जाने वाला रसायन है, और गैस के रूप में इसके रिसाव से आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। क्लोरीन गैस आंखों, नाक, गले और फेफड़ों की नम सतहों में जलन पैदा कर सकती है। इसके संपर्क में आने पर खांसी, आंखों में पानी आना, नाक और गले में जलन, सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण हो सकते हैं।