मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत-पाक रिश्तों में संवाद की आवश्यकता
संवाद और सामंजस्य की आवश्यकता
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मुंबई में 'इण्डियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस' के 15वें वार्षिक समारोह में उन्होंने कहा कि भारत का मार्ग टकराव नहीं, बल्कि संवाद और सामंजस्य है।
पाकिस्तानी लोग दुश्मन नहीं
"पाकिस्तानी दिल से दुश्मन नहीं हैं"
Gen Z के सवालों का उत्तर देते हुए भागवत ने पाकिस्तान और चीन के साथ चल रहे तनाव पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के आम नागरिक भारतीयों के दुश्मन नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "यह सच नहीं है कि पाकिस्तानी दिल से भारतीयों के दुश्मन हैं। लेकिन राज्य, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय सीमाएं जीवन की वास्तविकता हैं।" संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि स्थायी दुश्मनी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती।
संघर्ष के समय सरकार का समर्थन
"युद्ध के समय सरकार के साथ, पर रिश्ते हमेशा के लिए खत्म नहीं"
भागवत ने कहा कि जब देश में संघर्ष या युद्ध की स्थिति होती है, तो हर नागरिक को सरकार और सेना के साथ खड़ा होना चाहिए। ऐसे समय में कुछ रिश्तों को रोकना आवश्यक हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, "संघर्ष के कारण बने संबंध हमेशा के लिए समाप्त नहीं होने चाहिए। टकराव खत्म होने के बाद हमें वहीं से शुरुआत करनी चाहिए जहां हमने छोड़ा था।"
मानवता की एकता
"आखिरकार मानवता एक है"
आरएस प्रमुख ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव मुख्य रूप से राजनीतिक कारणों से है। उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि एक दिन यह टकराव समाप्त होगा और हमें एक होना पड़ेगा, क्योंकि आखिरकार मानवता एक है।"
भागवत ने 'भारतीय समाधान' की बात करते हुए कहा कि भारत का तरीका दूसरों पर विजय पाना नहीं है, बल्कि संवाद और एकता पर ध्यान केंद्रित करना है।
सैन्य तनाव के बीच आया बयान
पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि में आया बयान
संघ प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे।
इसके जवाब में भारत ने सैन्य कार्रवाई की थी, जो तीन दिन बाद युद्धविराम पर समाप्त हुई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भागवत का यह बयान पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट और कूटनीतिक संवाद को बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।