मोहन भागवत का विजयादशमी पर संदेश: एकता और विविधता का महत्व
विजयादशमी उत्सव पर मोहन भागवत का संबोधन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव और संघ के स्थापना दिवस के अवसर पर लोगों को संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान देश की एकता, इतिहास और संविधान के महत्व पर जोर दिया। भागवत ने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि जब भी हम आपस में बंटे और कमजोर हुए, तब हमारा पतन हुआ। यही कारण है कि हमें सैकड़ों वर्षों तक गुलामी का सामना करना पड़ा।
एकता के लिए भावनात्मक जुड़ाव जरूरी
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक विविधताओं से भरा देश है और इसे मजबूत बनाए रखने के लिए हमें अपने आपसी भावनात्मक रिश्तों को सुदृढ़ करना होगा।
मोहन भागवत ने बताया कि पिछले एक सदी से संघ का उद्देश्य लोगों में 'स्व' की भावना को जागृत करना रहा है। इसी 'स्व' के माध्यम से भारत को एकजुट और मजबूत बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना में 'हम भारत के लोग' शब्द इसी 'स्व' और आपसी अपनेपन की भावना को दर्शाता है।
'जब-जब बंटे तब हुआ पतन'
भागवत ने कहा कि जब हम एकजुट नहीं रहे, तब हम बिखर गए और गुलामी का शिकार बने। उन्होंने कहा, 'हम विभाजित हो गए और कमजोर पड़ गए। इसके बाद हमारा पतन लगातार होता गया।' उन्होंने यह भी बताया कि महान नेताओं और अनगिनत लोगों के प्रयासों से हमें स्वतंत्रता मिली और अब हमें एकता और प्रगति के रास्ते पर चलना है।
भारत की विविधता पर जोर
मोहन भागवत ने कहा कि भारत विविधताओं की भूमि है और हमें एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'यहां अपार प्राकृतिक विविधता के साथ-साथ धर्म, क्षेत्र, जाति, भाषा, खान-पान, रीति-रिवाजों और परंपराओं में भी विविधता है।' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि हमें इतिहास की तरह आगे बढ़ना है, तो हमें ऐसे बुनियादी सिद्धांत की आवश्यकता है जो इन सभी विविधताओं को स्वीकार करे।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस आयोजन में कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले शामिल थे। इसके अलावा, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इजराइल के कॉन्सुल जनरल यानिव रेवाच भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।