मोहन भागवत का विश्वास: भारत बनेगा विश्वगुरु
साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का संदेश
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में भारत दुर्गा शक्ति स्थल मंदिर के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, और कई अन्य धार्मिक नेता भी उपस्थित थे।
भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले इसे असंभव माना जाता था, लेकिन अब वह मंदिर सबके सामने है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का विश्वगुरु के रूप में पुनरुत्थान निश्चित है और इसे रोकना संभव नहीं है। इस दौरान, भागवत ने नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में एक मल्टीनेशनल अस्पताल का भी शिलान्यास किया।
भारत का मार्गदर्शन करने का संकल्प
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि देश के भविष्य पर संदेह न करें और साहस व आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीएं। उनका मानना है कि यदि लोग अपने संकल्प के अनुसार आगे बढ़ें, तो भारत नैतिक रूप से मजबूत बनेगा।
उन्होंने कहा कि भारत का विश्वगुरु बनने का सपना निरंतर प्रयासों और सामूहिक अनुशासन से साकार होगा। भागवत ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान पीढ़ी में इस तरह का परिवर्तन संभव है।
उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे साहस और आत्मनिर्भरता को अपने जीवन में अपनाएं, जिससे भारत मजबूत बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा।
पश्चिमी सोच को छोड़ने की आवश्यकता
डॉक्टर भागवत ने कहा कि भारत को सही तरीके से समझने के लिए इसे अपनी सभ्यता और सनातन मूल्यों के दृष्टिकोण से देखना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 150 वर्षों में विकसित पश्चिमी सोच से भारत को नहीं समझा जा सकता।
उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस विदेशी विचारधारा की परतों को उतार फेंकें। यदि हम अपने संकल्प के अनुसार आगे बढ़ें, तो भारत एक मजबूत और नैतिक वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा।