मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले USCIRF का विवादास्पद बयान
USCIRF की नई मांगें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले, अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने एक विवाद खड़ा कर दिया है। आयोग ने अमेरिकी प्रशासन से अनुरोध किया है कि आरएसएस के नेताओं को कोई राजनयिक सम्मान या उच्चस्तरीय बैठक न दी जाए। इसके बजाय, संघ और उसके सदस्यों पर कथित धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
आसिफ महमूद की भूमिका पर सवाल
USCIRF के वर्तमान अध्यक्ष आसिफ महमूद, जो पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक हैं, पर सवाल उठाए जा रहे हैं। महमूद का संबंध पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से है और उनका पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र से गहरा जुड़ाव रहा है। हिंदू-अमेरिकी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि महमूद का पाकिस्तान के राजनीतिक प्रतिष्ठान के साथ निकटता उनकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा करती है।
भारत विरोधी गतिविधियों का इतिहास
आसिफ महमूद का अतीत भारत विरोधी गतिविधियों से भरा हुआ है। 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद, उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर सुनवाई कराने के लिए सक्रिय रूप से लॉबिंग की थी और खुद गवाही भी दी थी। आयोग की अध्यक्षता संभालने के बाद, उन्होंने भारत को 'विशेष चिंता वाले देश' (CPC) की सूची में डालने और भारतीय खुफिया एजेंसी (R&AW) के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है।
राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा
विश्लेषकों का मानना है कि आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की यह नई मांग एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। जबकि पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थानीय लोगों पर दमन जारी है, आयोग के प्रमुख भारत के खिलाफ एक पक्षपातपूर्ण अभियान चला रहे हैं। इस कारण से, यह कदम धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि विशिष्ट राजनीतिक और कूटनीतिक एजेंडे से प्रेरित माना जा रहा है।