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मोहन भागवत ने 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट की संभावना को किया खारिज

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें या प्रधानमंत्री मोदी को रिटायर नहीं होना चाहिए। उन्होंने हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की और भाजपा तथा संघ के बीच विवाद की खबरों को नकारा। भागवत ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर भी अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने कहा कि दोनों समुदाय पहले से एक हैं। इस लेख में भागवत के विचारों और संघ के भविष्य पर चर्चा की गई है।
 

आरएसएस प्रमुख का बयान

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष की आयु में खुद या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिटायर होने की संभावना को नकार दिया है। संघ के शताब्दी समारोह के तहत आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के तीसरे दिन, भागवत ने कहा, 'मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे या किसी और को 75 वर्ष की उम्र पूरी करने पर रिटायर हो जाना चाहिए।' उल्लेखनीय है कि हाल ही में उन्होंने कहा था कि जब आपको 75 वर्ष की शॉल ओढ़ाई जाती है, तो इसका अर्थ है कि आपको नए लोगों के लिए स्थान छोड़ देना चाहिए।


अगले महीने, संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी दोनों 75 वर्ष के हो जाएंगे। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में, भागवत ने कहा कि किसी विवाहित व्यक्ति के संघ प्रमुख बनने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन उस व्यक्ति को संघ को पूरा समय देना होगा। इसके अलावा, उन्होंने हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की अपील की और 'हम दो, हमारे तीन' का नारा दिया। उनका कहना था कि हर परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए।


भागवत ने भाजपा और संघ के बीच विवाद की खबरों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा, 'भाजपा और संघ में कोई विवाद नहीं है। हमारे भाजपा सरकार के साथ ही सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं।' सरकार में निर्णय लेने के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन निर्णय वे ही लेते हैं। अगर हम तय करते, तो इतना समय नहीं लगता।'


गिरफ्तारी और 30 दिन की हिरासत पर मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को हटाने के लिए लाए गए बिल पर भागवत ने कहा, 'नेतृत्व और नेताओं की छवि साफ होनी चाहिए। इस पर कानून बने या नहीं, यह संसद तय करेगी।' आरएसएस के एक सौ साल पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में तीन दिन का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके अंतिम दिन प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। इस सत्र में भागवत ने कहा कि जब प्रणव मुखर्जी संघ के मंच पर आए, तो संघ के प्रति उनकी गलतफहमी दूर हो गई थी। अन्य राजनीतिक दलों के भी मन परिवर्तन हो सकते हैं।


एक प्रश्न के उत्तर में भागवत ने हिंदू-मुस्लिम विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'नाम और शब्दों के झगड़े में हम नहीं पड़ते। इन शब्दों के कारण हिंदू-मुस्लिम की भावना आ गई है।' उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे पहले से एक हैं। केवल उनकी पूजा में परिवर्तन हुआ है। लेकिन जो डर भर दिया गया है कि ये लोग रहेंगे तो क्या होगा, इतनी लड़ाई हुई, अत्याचार हुआ, इतने कत्लेआम हुए, देश भी टूटा।'