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मोहन भागवत ने नई पीढ़ी के विचारों पर की चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में एक कार्यक्रम में नई पीढ़ी के विचारों पर चर्चा की। उन्होंने Gen Z के विरोध प्रदर्शनों को देशविरोधी नहीं मानने की बात कही और शिक्षा में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। भागवत ने कहा कि आज की पीढ़ी तार्किक उत्तर चाहती है और समाज की भागीदारी के बिना शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है। उनके विचारों ने नई पीढ़ी की सोच और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता को उजागर किया।
 

मोहन भागवत का महत्वपूर्ण बयान


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में नई पीढ़ी के बारे में महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि यदि Gen Z किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है, तो इसे देशविरोधी नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह नई पीढ़ी है जो हर विषय पर तार्किक उत्तर चाहती है और इसकी सोच पिछले पीढ़ियों से भिन्न है।


नई पीढ़ी के सवाल

VIDEO | Mumbai: On being asked about protests and concerns that protesters may be labelled "anti-national", RSS chief Mohan Bhagwat, while addressing Gen Z and Gen Alpha, says, "...I want to make it clear that if Gen Z engages in any agitation, they are not anti-national. They… pic.twitter.com/XWU9coSnTg

— Press Trust of India (@PTI_News) August 6, 2026


भागवत ने बताया कि जब उनकी पीढ़ी युवा थी, तब बड़े-बुजुर्गों की बातों को बिना सवाल किए मान लिया जाता था। लेकिन आज की Gen Z हर बात का तर्क जानने की इच्छा रखती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्वाभाविक है और इसे नकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार, Gen Z और Gen Alpha मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं और देशभक्ति तथा समाज सेवा की सच्ची भावना उन्हें आकर्षित करती है।


छात्रों पर कार्रवाई की चिंता

#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On recent students' protest and dialogues, RSS chief Mohan Bhagwat says, "...In democracy, protest is also a method to have consensus. Lot of views come together and a consensus is evolved after discussion, that discussion may happen through… pic.twitter.com/NYItiwEUXN

— ANI (@ANI) August 6, 2026


दिल्ली में पिछले महीने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि लाठीचार्ज और पैलेट गन का उपयोग क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों और कारणों का गहन अध्ययन होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने किसी पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया।


शिक्षा में सुधार की आवश्यकता

भागवत ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में केवल एक-दो बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाना चाहिए और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों की फीस संरचना की समीक्षा करने और शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।


शिक्षा बजट में वृद्धि की मांग

मोहन भागवत ने शिक्षा पर सरकारी खर्च को बढ़ाकर कुल बजट का 6 प्रतिशत करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की भागीदारी भी आवश्यक है। स्कूलों के विकास, शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर शिक्षण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को सक्षम बनाना होना चाहिए, न कि इसे केवल व्यवसाय का माध्यम बनाना।