मोहन भागवत ने पश्चिम एशिया में तनाव पर विचार साझा किए
मोहन भागवत का संदेश
मोहन भागवत ने पश्चिम एशिया में तनाव पर विचार साझा किए: आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को एक सभा में कहा कि विश्व में अधिकांश संघर्षों की जड़ स्वार्थ और वर्चस्व की इच्छा है। उन्होंने बताया कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही संभव है। नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद भागवत ने यह बातें कहीं।
भागवत ने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत मानवता के सिद्धांतों का पालन करता है, जबकि अन्य देश 'योग्यतम की उत्तरजीविता' के सिद्धांत पर चलते हैं। उनके अनुसार, भारत का स्वभाव सद्भाव और एकता में विश्वास करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत जैसे देशों की उम्मीद है कि वे ईरान और इजराइल के बीच के तनाव को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने समाज में मौजूद चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच की भावना आज भी विद्यमान हैं। भागवत ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान हमें सिखाता है कि सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और मूल रूप से एक ही हैं। धर्म केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी परिलक्षित होना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए निरंतर अभ्यास आवश्यक है, भले ही इसमें व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना करना पड़े।