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मोहाली में बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोपी को मिली तीन साल की सजा

मोहाली की विशेष अदालत ने जीडी इस्पात उद्योग के साझेदार समीर दुआ को बैंक धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि दुआ और अन्य ने झूठी जानकारियों के जरिए बैंक से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त की थी। इस मामले में सह-आरोपी दिलीप दुआ का निधन हो चुका है, जिसके कारण उनकी कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी गई। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सीबीआई की कार्रवाई के बारे में।
 

बैंक धोखाधड़ी का मामला

मोहाली - केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने करोड़ों रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ स्थित जीडी इस्पात उद्योग के साझेदार समीर दुआ को दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई है। सीबीआई द्वारा शुक्रवार को जारी एक प्रेस नोट में बताया गया कि मोहाली की विशेष अदालत ने 4 जून को समीर दुआ को तीन वर्ष के कठोर कारावास और 15,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।


सीबीआई के अनुसार, इस मामले में समीर दुआ, दिलीप दुआ और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय ओवरसीज बैंक (आईओबी), मंडी गोबिंदगढ़ शाखा के साथ धोखाधड़ी करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जांच में यह पाया गया कि आरोपियों ने झूठी और फर्जी जानकारियों के माध्यम से बैंक से 4 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट प्राप्त की थी, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।


सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर समीर दुआ को दोषी पाया और सजा सुनाई। सीबीआई ने यह भी बताया कि सह-आरोपी दिलीप दुआ के निधन के कारण उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी। इससे पहले, 1 जून को सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी मामले में रिलायंस कम्युनिकेशन ग्रुप (आरकॉम) के एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार किया था। जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने आरकॉम के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला को गिरफ्तार किया, जिन पर लोन फंड के गलत इस्तेमाल के कारण बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है।