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म्यांमार के राष्ट्रपति का भारत दौरा: सुरक्षा और सहयोग पर जोर

म्यांमार के राष्ट्रपति जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने भारत में अपनी चार-दिवसीय यात्रा के दौरान सुरक्षा और सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि म्यांमार की भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और आर्थिक जुड़ाव पर भी चर्चा हुई। जानें इस महत्वपूर्ण यात्रा के बारे में और क्या कहा गया।
 

भारत-म्यांमार संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम


वर्तमान में विश्व के कई देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में, म्यांमार के राष्ट्रपति जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। शनिवार को चार दिवसीय यात्रा पर भारत आए ह्लाइंग ने आश्वासन दिया कि उनके देश की भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं किया जाएगा।


विदेश सचिव का बयान

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सोमवार को एक ब्रीफिंग में बताया कि म्यांमार के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने म्यांमार की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया।


विदेश सचिव ने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने अपनी सुरक्षा के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए संप्रभु क्षेत्र के दुरुपयोग को रोकने के महत्व पर जोर दिया। इस दौरान, म्यांमार के राष्ट्रपति ने फिर से आश्वासन दिया कि उनकी भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।


ह्लाइंग की यात्रा का उद्देश्य

ह्लाइंग की चार-दिवसीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ तकनीकी, ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करना है। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने पीएम मोदी के साथ कई मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच गहरे संबंध स्थापित करना है।


पीएम मोदी का सोशल मीडिया पर पोस्ट

पीएम मोदी ने इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि आंग ह्लाइंग के साथ उनकी सार्थक बैठक हुई। उन्होंने यह भी सराहा कि म्यांमार के नेता ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना।


प्रधानमंत्री ने कहा कि ह्लाइंग ने अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया से की और इसे भगवान बुद्ध का आशीर्वाद प्राप्त करना बताया। बैठक के दौरान, दोनों देशों के संबंधों की पूरी समीक्षा की गई और द्विपक्षीय संबंधों पर जोर दिया गया। विदेश सचिव ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस यात्रा का मुख्य ध्यान आर्थिक जुड़ाव पर भी रहा।