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यमन की धमकी से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका

यमन ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है। यदि यह जलडमरूमध्य बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। यह स्थिति भारत के लिए भी गंभीर है, क्योंकि यह समुद्री मार्ग कच्चे तेल और एलपीजी के आयात के लिए महत्वपूर्ण है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

यमन ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी


यमन ने दी बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी


नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया की स्थिति बिगड़ती जा रही है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। अब यमन ने भी एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की चेतावनी दी है।


यदि यमन बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करता है, तो इसका वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की आपूर्ति में भारी कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।


यमन की धमकी का कारण

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि यदि सऊदी अरब यमन के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जारी रखता है, तो बाब अल-मंडेब और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है। उन्होंने सोमवार को कहा कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इन जलडमरूमध्य को एक कार्यकारी गठबंधन के तहत बंद किया जाएगा, जिससे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।


भारत के लिए समुद्री मार्ग का महत्व

भारत कच्चे तेल और एलपीजी के आयात के लिए पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर निर्भर है। यह मार्ग निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारतीय रिफाइनर्स नियमित रूप से इस जलडमरूमध्य के माध्यम से यूरोपीय खरीदारों को रिफाइन पेट्रोलियम उत्पाद भेजते हैं।


भारत का लगभग 95% व्यापार समुद्र के रास्ते होता है, जिससे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तरी अफ्रीका के लिए निर्यात का एक महत्वपूर्ण द्वार बनता है। स्वेज नहर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य मिलकर भारत के कुल विदेशी व्यापार का लगभग 35% सुगम बनाते हैं।