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युवाओं के लिए सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज का शुभारंभ

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बेंगलुरु में सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज का उद्घाटन किया, जो युवाओं को उनके आस-पास की समस्याओं के समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा। इस चैलेंज में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और अन्य केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। प्रतिभागी विभिन्न स्तरों पर भाग ले सकते हैं, और उन्हें विशेषज्ञों से सहायता, लैब सुविधाएं और फंडिंग प्राप्त होगी। यह पहल युवाओं के विचारों को वास्तविकता में बदलने का अवसर प्रदान करती है।
 

सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज का उद्घाटन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज की शुरुआत की। यह पहल युवाओं को उनके आस-पास की समस्याओं की पहचान करने और उनके समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी, जिन्हें प्रयोग करके और आवश्यकतानुसार सुधार किया जा सकेगा। इसके बाद, इन समाधानों को वास्तविकता में लागू किया जा सकेगा।


चैलेंज में शामिल राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

यह चैलेंज बेंगलुरु के IISc में शुरू हुआ है और इसमें कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी जैसे पांच राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।


भागीदारी के लिए पात्रता

कौन ले सकता है इसमें भाग?


शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह चैलेंज स्कूलों, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), पॉलिटेक्निक, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को एक साथ लाएगा। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के छात्र, ITI और पॉलिटेक्निक के विद्यार्थी, कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र भाग ले सकेंगे। भागीदारी तीन स्तरों पर होगी: जूनियर, टेक्निकल और ओपन।


स्कूल के छात्र अपने आस-पास की समस्याओं और उनके सरल समाधानों पर काम करेंगे। ITI और पॉलिटेक्निक के छात्र तकनीकी समस्याओं के समाधान विकसित करेंगे, जबकि कॉलेज, विश्वविद्यालय और शोधकर्ता ऐसे प्रोटोटाइप या मॉडल तैयार करेंगे जिन्हें वास्तविकता में लागू किया जा सके।


चैलेंज के मुख्य विषय

पांच राष्ट्रीय थीम पर ध्यान केंद्रित



  • क्लीन और सस्टेनेबल भारत

  • समृद्ध किसान-समृद्ध भारत

  • स्वस्थ और समावेशी भारत

  • शिक्षित और कुशल भारत

  • सुरक्षित भारत


आज, 25 सितंबर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू होगी और यह 24 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। प्रतियोगिता का राष्ट्रीय फिनाले 10 से 17 दिसंबर तक नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों की सहायता, लैब और परीक्षण सुविधाएं, प्रोटोटाइप बनाने की सुविधा, इनक्यूबेशन सपोर्ट और प्रारंभिक फंडिंग प्राप्त हो सकती है।


आइडिया को लागू करने का अवसर

आइडिया को बड़े स्तर पर लागू करने का मौका


प्रतिभागियों को दिए गए आइडिया का परीक्षण करने और पेटेंट या बौद्धिक संपदा से संबंधित सहायता भी प्रदान की जाएगी। अच्छे समाधानों को सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और निजी कंपनियों के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर लागू करने का अवसर भी मिल सकता है।


प्रतिभागियों को अकादमिक और उद्योग मेंटरशिप, लैब्स, मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं, परीक्षण समर्थन, इनक्यूबेशन, सीड और पायलट फंडिंग, फील्ड-टेस्टिंग के अवसर और बौद्धिक संपदा संरक्षण पर मार्गदर्शन प्राप्त होगा। अच्छे समाधानों को अपनाने के लिए मंत्रालय, राज्य सरकारों, शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और उद्योग से भी जोड़ा जा सकता है।


यह पहल शिक्षा मंत्रालय, AICTE और UGC द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है, जबकि IISc बेंगलुरु इसका नोडल संस्थान होगा। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं के विचारों को केवल विचारों तक सीमित न रखना, बल्कि उन्हें परीक्षण, कार्यान्वयन और आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर उपयोग करने तक ले जाना है।