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यूएई ने पायलट स्मित मच्छार को दिया सर्वोच्च सम्मान, 180 यात्रियों की जान बचाई

कैप्टन स्मित मच्छार को यूएई ने उनके अदम्य साहस के लिए सम्मानित किया है। उन्होंने एक जानलेवा हमले के दौरान 180 यात्रियों की जान बचाई। इस घटना में उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें एक नायक बना दिया। जानें कैसे उन्होंने इस संकट का सामना किया और अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की।
 

साहसिकता का परिचय देते हुए पायलट को मिला सम्मान

दुबई: एक विमान के कॉकपिट में जानलेवा हमले के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सम्मानित किया है। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान में सवार यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बचाई। उन्हें और उनकी टीम को 'फर्स्ट-क्लास ऑर्डर ऑफ जायद II' से नवाजा गया। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनके साहस की सराहना की।


मंगलवार को राष्ट्रपति ने क्रू सदस्यों से मुलाकात की, जिसमें दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी शामिल थे। दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने क्रू को सम्मानित किया। यूएई नेतृत्व ने कठिन परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए उनकी प्रशंसा की।


यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई। कॉकपिट में गंभीर हिंसक घटना के बाद विमान का नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। स्थिति बिगड़ने पर विमान को सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ना पड़ा, जिसमें कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए।


कैप्टन मच्छार ने एक इंटरव्यू में बताया कि कॉकपिट का दरवाजा खोलने से पहले ही को-पायलट ने उन पर कई बार हमला किया। शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिरा है, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि उन पर उनकी ही टीम के एक सदस्य ने हमला किया है।


हमलों के कारण उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को हमले से बचाने की कोशिश की। गंभीर चोटों के बावजूद, उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का प्रयास किया और अपने साथियों को आवाज दी। इसी दौरान वह बेहोश होकर गिर पड़े।


कैप्टन के अनुसार, घटना के दौरान विमान लगभग 17,000 फीट नीचे गिर गया था। सबसे भयावह क्षण तब आया जब उन्होंने विमान के इंजन बंद होने की आवाज सुनी। ऐसी स्थिति में विमान को सुरक्षित संभालना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन क्रू ने हिम्मत नहीं छोड़ी।


रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टन मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद अन्य क्रू सदस्यों और यात्रियों ने अंदर पहुंचकर को-पायलट को काबू किया। बताया गया कि को-पायलट ने कैप्टन पर कुल्हाड़ी से हमला किया था।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विमान से आपातकालीन संकेत भेजा गया और फ्लाइट की तबुक में आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। विमान सुरक्षित उतर गया और सभी 180 यात्रियों को बचा लिया गया। इस घटना ने दिखाया कि संकट के समय में क्रू की सूझबूझ और साहस कितनी जिंदगियां बचा सकते हैं।


इतने खतरनाक अनुभव के बावजूद, कैप्टन मच्छार का विमानन के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा, "क्या विमानन के लिए मेरा प्यार खत्म हो गया? बिल्कुल नहीं। मुझे खुशी है कि मैं अपना फर्ज निभा पाया।"


घटना के बाद दुबई के क्राउन प्रिंस ने कैप्टन मच्छार से मुलाकात की और उनके साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कैप्टन मच्छार यूएई के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।


इस्राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भी कैप्टन मच्छार को 'नागरिक वीरता' के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस प्रकार, यूएई और इस्राइल दोनों देशों की ओर से मिलने वाला सम्मान उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा की पहचान बन गया है।