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यूके में भारतीय मूल की थेरेपिस्ट की नौकरी गई, अंग्रेजी न समझ पाने का आरोप

ब्रिटेन में एक भारतीय मूल की स्पीच और लैंग्वेज थेरेपिस्ट को उसकी पहली भाषा अंग्रेजी न होने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया। साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु ने आवेदन में अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। इस मामले में उन्होंने बर्खास्तगी के फैसले को चुनौती दी है, यह कहते हुए कि उनकी शिक्षा अंग्रेजी में हुई थी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की कहानी।
 

फॉर्म में गलत जानकारी देने का आरोप


Indian Therapist, लंदन: ब्रिटेन में एक भारतीय महिला को उसकी पहली भाषा अंग्रेजी न होने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया। महिला ने नौकरी के लिए आवेदन करते समय यह बताया था कि उसकी पहली भाषा अंग्रेजी है। इस थेरेपिस्ट का नाम साई कीर्तना श्रीपेरंबुदुरु है। सहकर्मियों ने पाया कि वह मरीजों और स्टाफ की बातों को ठीक से समझ नहीं पा रही थीं। यह घटना जून 2024 की है, लेकिन अब इसका खुलासा हुआ है।


उच्चारण, व्याकरण और बातचीत समझने में समस्या

कीर्तना ने अक्टूबर 2023 में यॉर्क एंड स्कारबरो टीचिंग हॉस्पिटल्स एनएचएस ट्रस्ट में काम करना शुरू किया। जल्द ही सहकर्मियों को पता चला कि वह मरीजों और स्टाफ की अंग्रेजी को सही से नहीं समझ पा रही थीं। स्पीच थेरेपिस्ट होने के बावजूद, उन्हें उच्चारण, व्याकरण और बातचीत में कठिनाई का सामना करना पड़ा। अंततः, जून 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।


अंग्रेजी फर्स्ट लैंग्वेज का दावा गलत निकला

आवेदन में कीर्तना ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा बताया था, लेकिन बाद में एक मीटिंग में उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी मातृभाषा तेलुगु है। दिसंबर में उन्होंने बताया कि वह नौकरी के साथ-साथ अंग्रेजी सुधारने के लिए कक्षाएं भी ले रही थीं।


इस मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि उन्होंने आवेदन में अंग्रेजी को अपनी फर्स्ट लैंग्वेज बताया, जबकि फॉर्म के नियमों के अनुसार, फर्स्ट लैंग्वेज वही होती है जो व्यक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे अधिक उपयोग करता है। केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करना इसे पहली भाषा नहीं बनाता।


नौकरी से निकाले जाने के फैसले को दी चुनौती

साई कीर्तना ने ट्रस्ट द्वारा बर्खास्तगी के निर्णय को चुनौती दी और हेल्थ एंड केयर प्रोफेशन्स ट्रिब्यूनल सर्विस (एचसीपीटीएस) में कहा कि उनकी शिक्षा अंग्रेजी में हुई थी, इसलिए इसे उनकी फर्स्ट लैंग्वेज माना जाना चाहिए। हालांकि, इस पर असहमति जताई गई और कहा गया कि नौकरी पाने के लिए ट्रस्ट को धोखा देने की कोशिश की गई है।


फॉर्म में पूछा गया था कि क्या अंग्रेजी आपकी फर्स्ट लैंग्वेज है? हां तभी कहना चाहिए जब अंग्रेजी आपके दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली प्राथमिक या एकमात्र भाषा हो। केवल अंग्रेजी में पढ़ाई करना इसे आपकी फर्स्ट लैंग्वेज नहीं बना देता। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, साई कीर्तना ने दावा किया कि उन्हें विश्वास था कि उनकी शिक्षा और पेशेवर अनुभव के कारण अंग्रेजी को फर्स्ट लैंग्वेज माना जा सकता है।