☰
×

यूपी अस्पतालों में दवाओं की कीमतों में विसंगति की जांच, 214 अस्पतालों में मिलीं भिन्नताएँ

उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में दवाओं की कीमतों में विसंगति की जांच की गई है, जिसमें 214 अस्पतालों से एक ही दवा की अलग-अलग अधिकतम खुदरा कीमतें सामने आई हैं। FSDA ने 167 दवाओं की सूची केंद्र सरकार को भेजी है और दवा विक्रेताओं को कीमतें सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। इस जांच में गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर पाए गए हैं, जो मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
 

लखनऊ में दवाओं की कीमतों की जांच


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अस्पतालों की फार्मेसी से एकत्रित दवाओं और इंजेक्शनों के नमूनों की जांच में एक ही कंपनी की दवा की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) में भिन्नता पाई गई है। ये दवाएं गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोग होती हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने ऐसी 167 दवाओं की सूची केंद्र सरकार को भेजकर आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की है। इसके साथ ही, प्रदेश के दवा विक्रेताओं को दवा की खरीद मूल्य को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है ताकि कीमतों में विसंगति और मुनाफाखोरी को नियंत्रित किया जा सके।


FSDA के अधिकारियों के अनुसार, 214 अस्पतालों में एकत्र की गई दवाओं की एमआरपी की तुलना की गई। इसमें रिलायंस लाइफसाइंस की टेनक्टे-प्लेज 40 एमजी (टेनक्टेरेल) इंजेक्शन की कीमत 43,119 रुपये से लेकर 49,060 रुपये तक पाई गई। इस इंजेक्शन की एक खुराक की कीमत में 5,941 रुपये का अंतर देखा गया है।


एक ही दवा पर विभिन्न एमआरपी

विभाग के अनुसार, एक ही ब्रांड और दवा की अलग-अलग प्रतिष्ठानों में अलग-अलग एमआरपी होना उपभोक्ता मूल्य निर्धारण में गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, कीमतों में वार्षिक संशोधन की गुंजाइश है, लेकिन किसी भी वृद्धि को 10 प्रतिशत की सीमा के भीतर ही रखा जाना चाहिए। इसके विपरीत, विभिन्न संस्थानों में एक ही उत्पाद की एमआरपी में बड़ा अंतर यह दर्शाता है कि कीमतें एक समान मानक के आधार पर निर्धारित नहीं हो रही हैं।


FSDA की जांच में यह भी सामने आया है कि एक ही दवा की अलग-अलग एमआरपी कई बार फार्मा कंपनियों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच तय होने वाली व्यावसायिक शर्तों से प्रभावित होती हैं। इससे ट्रेड मार्जिन बढ़ने और दवाओं की कीमतों में अनावश्यक वृद्धि का असर सीधे मरीजों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।


दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर

जांच में रिलायंस लाइफसाइंस की टेनक्टे-प्लेज 40 एमजी (टेनक्टेरेल) की अलग-अलग संस्थागत आपूर्ति में एमआरपी 43,119.14 रुपये से 49,060 रुपये तक दर्ज की गई, जिससे 5,940.86 रुपये का अंतर सामने आया। इसी कंपनी की ह्यूमन एल्बुमिन 20 प्रतिशत (एल्बुराल) की एमआरपी में भी भिन्नता पाई गई।


इंटास की ह्यूमन एल्बुमिन 20 प्रतिशत (एल्बुसेल) की एमआरपी में 3,003 रुपये का अंतर देखा गया। इसी तरह, इंटास की बेवासिजुमैब 400 एमजी (बेनेटास) पर भी 5,699.10 रुपये का अंतर पाया गया।


दवा की कीमतों में पारदर्शिता लाने के प्रयास

दवा कीमतों में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए यूपीएफएसडीए ने अस्पतालों में फार्मेसियों में प्राइसिंग डिस्क्लोजर की व्यवस्था पर जोर दिया है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पताल फार्मेसी दवा की वास्तविक क्रय दर और मरीज को दवा जिस दर पर उपलब्ध कराई जा रही है, उसे स्पष्ट रूप से घोषित करे।


इससे मरीज और उनके परिजन यह जान सकेंगे कि संबंधित दवा अस्पताल ने किस दर पर खरीदी और उसे किस दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे दवा की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और खरीद और बिक्री दर का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।


केंद्र सरकार से आवश्यक कदम उठाने की अपील

FSDA की इस पहल का मुख्य उद्देश्य दवा की कीमतों को पारदर्शी बनाना है। दवाओं की सटीक रिटेल कीमत तय करने, सप्लाई चेन में ट्रेड मार्जिन निर्धारित करने और अस्पतालों में उपयोग होने वाली दवाओं को मूल्य नियंत्रित अनुसूचित सूची में शामिल करने जैसे निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिए जाने हैं।


इसलिए, इन मुद्दों पर भारत सरकार और एनपीपीए से आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।