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यूपी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ियों को स्वीकार किया

उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों को स्वीकार किया है, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल मच गई है। आयोग ने सोशल मीडिया पर अपनी गलती को मानते हुए स्पष्टीकरण दिया, लेकिन इसके बाद भी विवाद बढ़ गया। कुछ नामों ने जातिवाद का आरोप लगाने वाले लोगों को प्रेरित किया। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और किस तरह से यह चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
 

मतदाता सूची में हुई गड़बड़ियों की स्वीकार्यता


मतदाता सूची में त्रुटियाँ: उत्तर प्रदेश चुनाव आयोग ने विधान परिषद चुनाव के लिए मतदाता सूची में कई नामों, पिता के नाम और पते में हुई गड़बड़ियों को स्वीकार किया है। आयोग ने सोशल मीडिया पर अपनी गलती को मानते हुए स्पष्टीकरण दिया है, लेकिन इसके बाद भी विवाद उत्पन्न हो गया है।


हाल ही में, कई लोगों ने विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में सामने आई त्रुटियों का मुद्दा उठाया था। कुछ ने इन गलतियों को जातिवादी करार दिया, जिससे प्रदेश में राजनीतिक तनाव बढ़ गया। इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट की है।


‘राम ने यादव को मारा’ नाम पर विवाद


मतदाता सूची में दर्ज कुछ अन्य नामों ने भी विवाद को बढ़ावा दिया। इनमें 'राम ने यादव को मारा' और पिता के नाम के रूप में 'मूर्ख चंद यादव' जैसी प्रविष्टियाँ शामिल थीं। एक अन्य प्रविष्टि में 'राम ने शर्मा को मारा' के साथ पिता का नाम 'बी.कॉम.' दर्ज होने की बात सामने आई। ये गड़बड़ियाँ इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पाई गई थीं। इन असामान्य प्रविष्टियों पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए गए और कुछ ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ा।


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिम्मेदारी ली


मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोमवार को मतदाता सूची में हुई गलतियों को स्वीकार करते हुए इसकी जिम्मेदारी ली। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह की उस सोशल मीडिया पोस्ट को भी रीपोस्ट किया, जिसमें एक मतदाता का वीडियो साझा करते हुए इन गड़बड़ियों पर सवाल उठाए गए थे।


संजय सिंह का सवाल


संजय सिंह ने कहा कि ज्ञानेश कुमार जी, आखिर राम ने 'यादव' को ही क्यों मारा? किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय, बिष्ट को क्यों नहीं मारा?


हालिया विधान परिषद के चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम “राम ने शर्मा को मारा” भी है। कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है। हमारे द्वारा गलती किया जाना स्वीकार है लेकिन हमारे सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ है। भगवान का यह भी शुक्र है की राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा है। नहीं तो जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता।

— CEO Uttar Pradesh (@ceoup) October 25, 2026



आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि ज्ञानेश कुमार जी, आखिर राम ने 'यादव' को ही क्यों मारा? राम ने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय, बिष्ट को क्यों नहीं मारा? क्या आपका कंप्यूटर जातिवादी है? क्या आप किसी पार्टी का एजेंडा चला रहे हैं? राजेश यादव आपका सवाल सही है।


‘शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा’


चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें मतदाता सूची में दर्ज एक असामान्य नाम 'राम ने शर्मा को मारा' का जिक्र किया गया। आयोग ने अपनी पोस्ट में कहा कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं होता। आयोग ने गलती स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि गलती के दौरान जातिगत भेदभाव नहीं हुआ। पोस्ट में व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी लिखा गया कि भगवान का 'शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा', वरना जातिवाद के साथ सांप्रदायिकता का आरोप भी लग सकता था।