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यूपी में नीले रंग को लेकर सियासत गरमाई

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले, नीले रंग को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मायावती ने सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि केवल नीला कपड़ा पहनने से वे अम्बेडकरवादी नहीं बन सकते। इस विवाद में दलित मतदाताओं को लुभाने की कोशिशों का भी जिक्र है। जानें इस सियासी खेल के पीछे की पूरी कहानी।
 

यूपी में नीले रंग पर सियासी बहस


यूपी में नीले रंग पर सियासत: 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, सभी राजनीतिक दल दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। इस बीच, 'नीले रंग' को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसे अक्सर अम्बेडकरवादी विचारधारा से जोड़ा जाता है। समाजवादी पार्टी द्वारा 'नीले रंग' को अपनाने पर बसपा प्रमुख मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल केवल नीला कपड़ा पहनने से अम्बेडकरवादी नहीं बन सकते।


समाजवादी छात्रसभा ने हाल ही में अपनी नई ड्रेस कोड की घोषणा की है, जिसमें सदस्य नीली पेंट और नीली शर्ट पहनेंगे। इसके अलावा, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक कार्यक्रम में नीला गमछा पहनकर दलित मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की। इस पर मायावती ने विपक्षी दलों पर हमला करते हुए कहा कि उनके कपड़े पहनने से उनकी जातिवादी सोच नहीं बदल सकती।


मायावती ने एक्स पर लिखा, 'सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा बी.एस.पी. का नीला रंग अपनाने से उनकी सोच में कोई बदलाव नहीं आएगा। ये लोग हमेशा से ही गिरगिट की तरह रंग बदलते रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि बी.एस.पी. ही एकमात्र पार्टी है जो बहुजन समाज के वास्तविक हितों की रक्षा करती है।


1. सपा, कांग्रेस व अन्य विरोधी पार्टियों के नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा बी.एस.पी. का शुरु से ही चला आ रहा नीला रंग अब यह इनके गले का गमछा व कपड़े पहनने से तथा स्टेज आदि में भी नीला कपड़ा इस्तेमाल करने से इनकी सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े व अन्य…

— Mayawati (@Mayawati) September 11, 2026



उन्होंने आगे कहा, 'जो लोग पार्टी से निकाले जाते हैं, वे अक्सर दूसरी पार्टियों में शामिल होकर छोटे-छोटे संगठन बनाते हैं, जो बहुजन समाज के हित में नहीं होते। कांग्रेस पार्टी, जो निकाले गए लोगों को अपनी पार्टी में शामिल करने की बात कर रही है, वह खुद एक डूबता जहाज है।'


अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर मायावती की प्रतिक्रिया


बसपा के पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास पर मायावती ने कहा कि जब बी.एस.पी. ने उन्हें संन्यास लेने की सलाह दी थी, तब उन्होंने तुरंत ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ ने कई प्रयास किए ताकि वह संन्यास न लें, लेकिन अंततः उन्हें मजबूरी में यह घोषणा करनी पड़ी।