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यूरोप की सुरक्षा और अमेरिका: एक अनिवार्य संबंध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया है, जिससे नाटो की सुरक्षा पर अमेरिका की निर्भरता और भी स्पष्ट हो गई है। यूरोप की आधुनिक युद्ध क्षमताओं और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए, यह लेख बताता है कि कैसे यूरोप अमेरिका पर निर्भर है और इसके परिणामस्वरूप क्या चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं। क्या यूरोप अपनी सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भरता को कम कर पाएगा? जानें इस लेख में।
 

ट्रंप का नया टैरिफ निर्णय

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में सहयोगियों के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू कर दिया है। ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी पुरानी इच्छा के चलते ट्रंप ने यह कदम उठाया है, जबकि ये सभी देश नाटो (NATO) के सदस्य हैं। टैरिफ लगाने के साथ, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका पिछले कई वर्षों से डेनमार्क सहित यूरोपीय संघ के सभी देशों की सुरक्षा मुफ्त में कर रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि ये देश अमेरिका का यह कर्ज चुकाएं।


नाटो की निर्भरता

अमेरिका के बिना नाटो की स्थिति


ट्रंप के इस कठोर निर्णय के बावजूद यूरोपीय संघ की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न आना इस बात का संकेत है कि यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर कितनी निर्भरता रखता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नाटो संगठन की रीढ़ अमेरिका ही है, क्योंकि इस संगठन की 70 प्रतिशत से अधिक सैन्य क्षमता अकेले अमेरिका द्वारा प्रदान की जाती है। यूरोप की परमाणु सुरक्षा मुख्य रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस पर निर्भर है। इसके अलावा, रूस जैसे शक्तिशाली देशों का सामना करने के लिए आवश्यक तकनीक, जैसे मिसाइल डिफेंस और सैटेलाइट इंटेलिजेंस, अमेरिका के पास ही है। यदि अमेरिका नाटो से अलग हो जाता है, तो यह संगठन केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।


यूरोप की आधुनिक युद्ध क्षमता

युद्ध संसाधनों की कमी


यूरोपीय देशों के पास सैनिकों और टैंकों की संख्या तो पर्याप्त है, लेकिन आधुनिक युद्ध के लिए आवश्यक संसाधनों की भारी कमी है। एयर डॉमिनेंस, ड्रोन वॉरफेयर, और लॉन्ग-रेंज मिसाइल सिस्टम जैसी आवश्यकताएं अमेरिका ही पूरी करता है। यूक्रेन युद्ध के दौरान भी यह स्पष्ट हुआ कि यूरोप अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए वाशिंगटन पर निर्भर रहा।


आर्थिक और ऊर्जा निर्भरता

अर्थव्यवस्था में अमेरिका का दबदबा


आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका का पलड़ा भारी है। 2025 के अनुमानों के अनुसार, जहां पूरे यूरोप की सम्मिलित अर्थव्यवस्था 19.99 ट्रिलियन डॉलर है, वहीं अकेले अमेरिका की अर्थव्यवस्था 30.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, अधिकांश यूरोपीय देश अपनी जीडीपी का 2 प्रतिशत भी रक्षा पर खर्च नहीं करते। यदि अमेरिका सुरक्षा की जिम्मेदारी छोड़ देता है, तो यूरोप को अपना रक्षा बजट 2 से 3 गुना बढ़ाना होगा, जिसका सीधा असर वहां की जनता पर टैक्स के बोझ और कल्याण योजनाओं में कटौती के रूप में पड़ेगा।


ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भी, रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद से यूरोप पूरी तरह अमेरिका की ओर देख रहा है। यूरोप अब अमेरिकी एलएनजी (LNG) और कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक बन गया है। जर्मनी, फ्रांस और इटली जैसे देशों ने अमेरिकी गैस के लिए नए टर्मिनल बनाए हैं। इसके साथ ही, डिफेंस, एआई और मिसाइल सिस्टम के लिए आवश्यक हाईटेक चिप्स की सप्लाई के लिए भी यूरोप अमेरिका पर निर्भर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप को दोबारा आत्मनिर्भर बनने में 15 से 20 साल का समय लग सकता है, जिसके लिए उन्हें संयुक्त सेना बनाने और रक्षा उद्योग में भारी निवेश करने जैसे कड़े कदम उठाने होंगे।