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योगासन: दिल की सेहत के लिए आवश्यक उपाय

विश्व योग दिवस के अवसर पर, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने दिल की सेहत को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यस्त जीवनशैली में दिल की देखभाल करना अक्सर भूल जाते हैं। योग और ध्यान से न केवल दिल स्वस्थ रहता है, बल्कि यह तनाव को भी कम करता है। जानें कैसे नियमित योगाभ्यास से आप अपनी दिल की सेहत को सुधार सकते हैं और एक सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
 

दिल की सेहत के लिए योग का महत्व

नई दिल्ली: विश्व योग दिवस नजदीक है, और इस अवसर पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने दिल की सेहत को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मंत्रालय का कहना है कि आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग अपनी उपलब्धियों और आय पर ध्यान तो देते हैं, लेकिन दिल की देखभाल करना अक्सर भूल जाते हैं। दिल हमारी जिंदगी की हर धड़कन को बनाए रखता है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक पाने और कमाने की दौड़ में हम उस अंग की अनदेखी कर देते हैं जो बिना थके दिन-रात काम करता है। एक स्वस्थ दिल लंबी और खुशहाल जिंदगी की नींव है। मंत्रालय ने योगासन, ध्यान और प्राणायाम को दिल की सेहत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।


योग और ध्यान से मन को शांति मिलती है, तनाव कम होता है और भावनात्मक स्वास्थ्य में सुधार होता है। नियमित योगाभ्यास से रक्तचाप नियंत्रित रहता है, कोलेस्ट्रॉल स्तर संतुलित होता है और हृदय की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। भुजंगासन, शवासन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम और सूर्य नमस्कार जैसे आसन दिल की सेहत को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये आसन रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और हृदय को स्वस्थ रखते हैं।


भुजंगासन: - पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाना। यह रीढ़ को मजबूत बनाता है और पीठ दर्द में लाभकारी होता है।


शवासन: - पीठ के बल पूरी तरह आराम की मुद्रा में लेटना। यह मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को विश्राम देने में मदद करता है।


अनुलोम-विलोम प्राणायाम: - एक नासिका से श्वास लेकर दूसरी से छोड़ने की प्रक्रिया। यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और मन को शांत रखने में सहायक है।


सूर्य नमस्कार: - 12 योग मुद्राओं का क्रमबद्ध अभ्यास। यह पूरे शरीर का व्यायाम है, जिससे लचीलापन, शक्ति और ऊर्जा बढ़ती है।


विशेषज्ञों के अनुसार, व्यस्त दिनचर्या में कुछ समय निकालकर योग और ध्यान करने से न केवल दिल स्वस्थ रहता है, बल्कि बुढ़ापे में भी सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। इसके लिए रोजाना सुबह 30 से 45 मिनट योगासन का अभ्यास करना चाहिए। हार्ट के लिए गहरी सांस लेने वाले व्यायाम अपनाएं, तनावपूर्ण विचारों से दूर रहें, संतुलित भोजन करें और पर्याप्त नींद लें।