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योगी सरकार का नया ट्रॉमा केयर रोडमैप: बच्चों की जान बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों के लिए एक नया ट्रॉमा केयर रोडमैप तैयार किया है, जिसका उद्देश्य गंभीर चोटों के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, प्रदेश के 6 करोड़ बच्चों के लिए एकीकृत ट्रॉमा केयर प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे हर साल लगभग 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य है। इसमें अस्पतालों, एंबुलेंस, और विशेषज्ञ चिकित्सकों को एक साझा नेटवर्क में जोड़ा जाएगा। इस पहल से इलाज में देरी को कम करने और 'गोल्डन ऑवर' के दौरान त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
 

लखनऊ में नई पहल

लखनऊ : योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बच्चों को गंभीर चोटों और दुर्घटनाओं के बाद त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए एक नया रोडमैप तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के लगभग 6 करोड़ बच्चों के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाली, कम लागत वाली ट्रॉमा केयर प्रणाली विकसित करना है। इसमें अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेफरल सिस्टम को एकीकृत नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल से हर साल लगभग 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य रखा गया है।


ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य

योगी सरकार ने बाल ट्रॉमा के लिए एकीकृत इमरजेंसी केयर आर्किटेक्चर विकसित करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य गंभीर रूप से घायल बच्चों को दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ उपचार और आगे की देखभाल तक समय पर और समन्वित चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। इससे इलाज में देरी और मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने में लगने वाले समय को कम किया जाएगा। वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी लगभग 3 से 5 प्रतिशत है, जबकि एकीकृत ट्रॉमा केयर के माध्यम से इसे 12 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस योजना के तहत प्रदेश में विभिन्न स्तर की ट्रॉमा सुविधाओं का नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिसमें लेवल-1 का एक, लेवल-2 के 36 और लेवल-3 के 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट (आईटीईएमयू) शामिल होंगे। इससे कुल 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाएं तैयार होंगी और लगभग 2,853 नए बेड जोड़े जाएंगे।


गोल्डन ऑवर पर ध्यान

पीडियाट्रिक ट्रॉमा में प्रारंभिक समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, दुर्घटना के बाद त्वरित प्रतिक्रिया, प्रशिक्षित चिकित्सा टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उपयुक्त ट्रॉमा सेंटर तक त्वरित रेफरल पर जोर दिया जाएगा। इस योजना में 'गोल्डन ऑवर' के दौरान इलाज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए योगी सरकार लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है।