रवनीत सिंह बिट्टू का मोदी कैबिनेट से इस्तीफा: नई राजनीतिक दिशा
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट से रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर लिया। यह निर्णय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत लिया गया है। बिट्टू के इस्तीफे की खबर के साथ ही मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
भाजपा की रणनीति: राज्य की राजनीति में सक्रियता
पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए, भाजपा अब रवनीत सिंह बिट्टू को राज्य की राजनीति में सक्रिय करने की योजना बना रही है। यह माना जा रहा है कि संगठन को मजबूत करने और चुनावों में जमीनी पकड़ बनाने के लिए उन्हें पंजाब भेजा जा रहा है।
कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए बिट्टू
रवनीत सिंह बिट्टू ने 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। वह कांग्रेस के युवा नेताओं में से एक थे और राहुल गांधी के करीबी माने जाते थे। बिट्टू, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी हत्या 1995 में खालिस्तानी आतंकियों द्वारा की गई थी।
लोकसभा चुनावों में बिट्टू की सफलता
रवनीत बिट्टू ने 2009, 2014 और 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लुधियाना से लोकसभा चुनाव जीते। 2024 में उन्होंने भाजपा जॉइन की और पटियाला सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भाजपा ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाकर संसद भेजा और केंद्रीय मंत्री का पद दिया।
पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष
बिट्टू ने 2019 में लुधियाना से 70,000 से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। 2014 में उन्होंने 20,000 मतों से जीत दर्ज की थी, जबकि 2009 में आनंदपुर साहिब से 60,000 से अधिक मतों के अंतर से जीते थे। 2009 में, उन्होंने पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में युवाओं में मादक पदार्थों की लत के खिलाफ अभियान शुरू किया।