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राऊ एवेन्यू कोर्ट में नीट पेपर लीक मामले की सुनवाई, जमानत पर फैसला सुरक्षित

राऊ एवेन्यू कोर्ट ने नीट पेपर लीक मामले में आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। सुनवाई के दौरान, वकील ने मनीषा की पेशेवर स्थिति और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए जमानत की मांग की। सीबीआई ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें परीक्षा से जुड़े प्रश्नों को अन्य आरोपियों तक पहुंचाने का आरोप शामिल है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 9 जून को आदेश सुनाने की बात कही है।
 

जमानत याचिका पर अदालत का निर्णय


राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक मामले में आरोपी मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका पर राऊ एवेन्यू कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। अदालत ने कहा है कि वह इस मामले में 9 जून को अपना आदेश सुनाएगी।


सुनवाई के दौरान, मनीषा वाघमारे के वकील ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल एक प्रमाणित एजुकेशन काउंसलर हैं और उन्हें काउंसलिंग के माध्यम से नियमित आय प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि सीबीआई द्वारा उल्लेखित बैंक लेन-देन लगभग 3.50 लाख रुपए का था, जो उन्हें पैतृक संपत्ति की गिफ्ट डीड के माध्यम से प्राप्त हुआ।


बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे के बैंक खातों में कोई संदिग्ध लेन-देन नहीं पाया गया है, जिसके आधार पर उन्हें हिरासत में रखा जा सके। वकील ने यह भी कहा कि सीबीआई ने उनके घर पर दो बार तलाशी ली, लेकिन वहां से कोई कैश या आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।


वकील ने अदालत को यह भी बताया कि 47 वर्षीय मनीषा वाघमारे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वर्टिगो जैसी गंभीर बीमारियां हैं और हाल ही में उन्हें जेल के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने अदालत से स्वास्थ्य और जांच में सहयोग करने की इच्छा को देखते हुए जमानत देने का अनुरोध किया।


हालांकि, अदालत ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जमानत के आधार के रूप में नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन के पास पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं और यदि किसी अतिरिक्त इलाज की आवश्यकता है तो उसके लिए अलग से आवेदन किया जा सकता है।


सीबीआई ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मनीषा वाघमारे खुद को एजुकेशन काउंसलर बताती हैं, लेकिन वह एक ब्यूटी पार्लर भी चलाती हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से जुड़े प्रश्नों को अन्य आरोपियों तक पहुंचाया और इसके बदले छात्रों से पैसे लिए। सीबीआई ने दावा किया कि उसके पास ऐसे छात्रों के बयान हैं, जिन्होंने मनीषा को रकम देने की बात स्वीकार की है।


अदालत ने कहा कि वह सीबीआई द्वारा पेश किए गए छात्रों के बयानों और अन्य साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन करेगी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया, जिस पर 9 जून को आदेश सुनाया जाएगा।