×

राजकोट AIIMS में MBBS छात्र की आत्महत्या: 17 पन्नों के सुसाइड नोट से खुलासा

गुजरात के राजकोट स्थित AIIMS में एक MBBS छात्र की आत्महत्या के मामले में 17 पन्नों का सुसाइड नोट सामने आया है। इस नोट में छात्र ने अपने साथ हो रही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच छात्रों को गिरफ्तार किया है, जो पीड़ित छात्र को प्रताड़ित करने के आरोप में हैं। यह मामला गंभीर सवाल उठाता है कि क्या पहले की शिकायतों पर उचित कार्रवाई की गई थी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

राजकोट AIIMS में छात्र की आत्महत्या का मामला


गुजरात के राजकोट में स्थित AIIMS में एक अंतिम वर्ष के MBBS छात्र की आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस को 17 पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसने जांच की दिशा बदल दी है। इस नोट के आधार पर, पुलिस ने पांच अन्य छात्रों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित छात्र को प्रताड़ित किया।


पीड़ित छात्र, रतन कुमार मेघवाल, का शव 14 मार्च 2026 को रेलवे ट्रैक के पास पाया गया। रतन जैसलमेर जिले के फलसुंड गांव का निवासी था और उसकी उम्र 25-26 वर्ष थी। वह AIIMS राजकोट में इंटर्न और अंतिम वर्ष का छात्र था।


सुसाइड नोट में प्रताड़ना का जिक्र


पुलिस ने मामले की जांच के दौरान 17 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद किया, जो हिंदी और अंग्रेजी में लिखा गया था। इस नोट में जनवरी 2026 से उसके साथ हो रही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का उल्लेख है। रतन ने बताया कि उसके साथ क्रूरता और जबरदस्ती की गई थी। यह कार्रवाई उसके पिता मोहनलाल मेघवाल की शिकायत पर की गई है।


आरोप है कि पांचों छात्रों ने रतन को एक छात्रा के साथ कथित रिश्ते के कारण निशाना बनाया। सुसाइड नोट में उल्लेख है कि 27 जनवरी को इन छात्रों ने मिलकर रतन के साथ मारपीट की और उसे लगातार धमकाते रहे। आरोपियों में प्रणव पालीवाल, अस्मित शर्मा, आयुष यादव, निर्विघ्नम नूर और युवराज चौधरी शामिल हैं।


पुलिस की कार्रवाई और आगे की प्रक्रिया


गांधीग्राम पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 108, धारा 3(5) और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। आगे की कार्रवाई के लिए गवाहों के बयान और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। यह पहली बार नहीं है जब रतन ने आत्महत्या की कोशिश की हो; जनवरी में भी उसने ऐसा प्रयास किया था। उस समय उसने आरोपियों के नाम लिए थे, लेकिन परिवार ने शिकायत नहीं की थी।


पुलिस ने पहले औपचारिक कार्रवाई नहीं की थी, लेकिन अब इस पर सवाल उठ रहे हैं। आरोपी भी MBBS के अंतिम वर्ष के छात्र हैं और परीक्षा देकर डॉक्टर बनना चाहते थे। हालांकि, उन्हें परीक्षा देने की अनुमति मिली है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। अदालत ने कहा है कि उन्हें पुलिस की हिरासत में रहकर परीक्षा देनी होगी।