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राजनाथ सिंह ने खालिदा जिया के निधन पर शोक व्यक्त किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने बांग्लादेश उच्चायोग में जाकर शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और उनके राजनीतिक योगदान को याद किया। खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत है। जानें उनके जीवन और भारत की ओर से व्यक्त की गई संवेदनाओं के बारे में।
 

राजनाथ सिंह का शोक संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने गुरुवार को नई दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग का दौरा किया, जहां उन्होंने बेगम खालिदा जिया के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।


राजनाथ सिंह ने शोक-पुस्तिका पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि बेगम जिया का निधन बांग्लादेश और पूरे क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण युग का अंत है। उन्होंने लिखा कि भारत सरकार और भारतीय जनता इस कठिन समय में बेगम जिया के परिवार और बांग्लादेश के नागरिकों के साथ खड़ी है।


रक्षा मंत्री ने बेगम जिया के राजनीतिक योगदान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह घटना बांग्लादेश की राष्ट्रीय राजनीति के लिए अत्यंत दुखद है। विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने उनके परिवार के प्रति सहानुभूति व्यक्त की है। खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।


यह ध्यान देने योग्य है कि 23 नवंबर को खालिदा जिया की तबियत बिगड़ने पर उन्हें ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने 41 वर्षों तक बीएनपी का नेतृत्व किया और 1990 के दशक में तानाशाही के खिलाफ आंदोलन के दौरान उन्हें 'समझौता न करने वाली लीडर' का खिताब मिला था। जिया ने पांच बार संसद के सदस्य के रूप में कार्य किया, तीन बार प्रधानमंत्री और दो बार विपक्ष की नेता के रूप में जिम्मेदारी निभाई। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका गए थे।


खालिदा जिया गंभीर बीमारियों से लंबे समय तक जूझने के बाद 31 दिसंबर 2025 को निधन हो गईं। उनके जनाजे में शामिल होने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर वहां पहुंचे थे। उन्होंने बांग्लादेश में बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक व्यक्तिगत पत्र उन्हें सौंपा। भारत सरकार और जनता की ओर से गहरी संवेदनाएं व्यक्त की गईं।