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राजनाथ सिंह ने प्रादेशिक सेना की भूमिका पर जोर दिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रादेशिक सेना की भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि यह 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं में सहायता, पर्यावरण संरक्षण में योगदान और युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करने की बात की। जानें इस बैठक में क्या चर्चा हुई और प्रादेशिक सेना की उपलब्धियों के बारे में।
 

प्रादेशिक सेना का महत्व


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रादेशिक सेना को 'नागरिक-सैनिक' सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यह 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा में बल की दोहरी भूमिका पर जोर दिया। यह बयान उन्होंने रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में दिया, जिसमें प्रादेशिक सेना के कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।


राजनाथ सिंह ने बताया कि प्रादेशिक सेना प्रशिक्षित कर्मियों का एक रिजर्व तैयार करती है, जो जरूरत पड़ने पर सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त क्षमता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि जब ये सदस्य नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक पुल का कार्य करते हैं, विशेषकर युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।


प्रादेशिक सेना को 59 इकाइयों में लगभग 44,400 कर्मियों का एक प्रशिक्षित बल बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सबसे पहले सहायता प्रदान करने वाले बल के रूप में उभरी है। इसने केरल में बाढ़, ओडिशा में चक्रवात और हाल ही में असम में आई बाढ़ के दौरान राहत और चिकित्सा सहायता प्रदान की।


पर्यावरण संरक्षण में इसके योगदान की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि प्रादेशिक सेना की इकोलॉजिकल टास्क फोर्स ने लगभग 10 करोड़ पौधे लगाए हैं, जिनकी जीवित रहने की दर 80-85 प्रतिशत है। इससे प्रधानमंत्री के 'मिशन लाइफ़' और 'पंचामृत' लक्ष्यों को साकार करने में मदद मिली है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 'हर घर तिरंगा' अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में इसकी भूमिका की भी प्रशंसा की।


बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।