राजनीति में हलचल: TMC और शिवसेना में बगावत के बाद NDA की स्थिति
राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव
तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) के बीच हाल में हुई महत्वपूर्ण बगावत ने देश की राजनीतिक स्थिति को गर्म कर दिया है। विपक्ष में बढ़ती दरार का लाभ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को मिल रहा है। जून में महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत शिवसेना (UBT) को एक बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए। इसी तरह, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद, पार्टी के 20 सांसदों ने भी बगावत कर दी। इन घटनाओं के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या केंद्र सरकार उन संवैधानिक संशोधनों को आगे बढ़ा पाएगी, जिन्हें पहले विपक्ष के विरोध के कारण रोक दिया गया था।
संसद के मानसून सत्र पर नजरें
विपक्ष के अचानक बिखरने और कुछ बागी नेताओं के NDA में शामिल होने के बाद, अब सभी की निगाहें संसद के मानसून सत्र पर हैं। यह सत्र सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बावजूद, NDA के लिए लोकसभा में दो-तिहाई यानी विशेष बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा। गठबंधन अभी भी इस लक्ष्य से कुछ कदम दूर है, और यह संसद के अंदर की रणनीति और निर्दलीय सांसदों के रुख पर निर्भर करेगा।
सरकार के प्रमुख मुद्दे
सरकार के एजेंडे में कौन से बड़े मुद्दे हैं?
केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण बिल लाने की योजना बना रही है। NDA सरकार की प्राथमिकता परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन बिल को आगे बढ़ाना और महिला आरक्षण कानून को लागू करना है। इसके अतिरिक्त, सरकार 130वां संविधान संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है, जिसमें प्रस्तावित है कि यदि कोई मंत्री गंभीर अपराध के मामले में 30 दिन से अधिक समय तक जेल या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे मंत्री पद से हटा दिया जाएगा।
लोकसभा में बहुमत का गणित
क्या कहता है लोकसभा में बहुमत का गणित?
संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, किसी भी संवैधानिक संशोधन को पास कराने के लिए केवल साधारण बहुमत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए दो शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली, सदन के कुल सदस्यों का दो तिहाई बहुमत, यानी लोकसभा में लगभग 362 सांसदों का समर्थन। दूसरी, जो सांसद सदन में मौजूद हों और वोटिंग करें, उनमें से दो-तिहाई का समर्थन मिलना आवश्यक है।
- दो-तिहाई का लक्ष्य: यदि लोकसभा के सभी मौजूदा 540 सांसद वोटिंग में भाग लेते हैं, तो बिल पास कराने के लिए सरकार को कम से कम 360 वोट जुटाने होंगे।
- NDA की मौजूदा ताकत: हालिया दलबदल के बाद NDA का आंकड़ा लगभग 318 से 319 सांसदों तक पहुंच गया है।
- दूरी और कमी: इस बढ़ी हुई ताकत के बावजूद, NDA अभी भी अपने दम पर दो-तिहाई (360) के आंकड़े से करीब 41 से 42 वोट दूर है।
- विपक्ष की स्थिति: बगावत से पहले विपक्षी गठबंधन 'INDIA' के पास 225 सांसद थे, जो अब घटकर लगभग 199 रह गए हैं।
360 का आंकड़ा कैसे होगा पार?
360 का आंकड़ा कैसे होगा पार?
इस कमी को पूरा करने के लिए BJP अब बारीकी से संसदीय रणनीति बना रही है। कोशिश की जाएगी कि YSRCP के 4 सांसदों का समर्थन प्राप्त किया जाए। इसके अलावा, यदि कांग्रेस से नाराज DMK (22 सांसद) और NCP-शरद पवार (8 सांसद) जैसी पार्टियां वोटिंग के समय सदन से बाहर चली जाती हैं या वोटिंग में भाग नहीं लेतीं, तो वोट डालने वाले सांसदों की कुल संख्या कम हो जाएगी। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 से घटकर लगभग 330 रह जाएगा। तब NDA के लिए निर्दलीय सांसदों और छोटे दलों के समर्थन से यह आंकड़ा पार करना काफी आसान हो जाएगा।