राजस्थान के स्थानीय चुनावों में भाजपा की हार: संघ प्रमुख का बयान और परिणामों का संबंध
राजस्थान में चुनाव परिणाम और भाजपा की स्थिति
यह एक दिलचस्प संयोग है कि आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत का यूजीसी के दिशा-निर्देशों पर बयान उसी दिन आया जब राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणाम घोषित हुए। सोमवार की सुबह जैसे ही नतीजे सामने आए, भाजपा के कई प्रमुख नेता चौंक गए। राजस्थान के कई प्रभावशाली नेताओं के क्षेत्रों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के भरतपुर क्षेत्र में भाजपा को हार मिली, जबकि वसुंधरा राजे के झालावाड़ क्षेत्र में भी पार्टी पिछड़ गई। अजमेर में कांग्रेस ने पहली बार बढ़त बनाई। इसके बाद मीडिया में रिपोर्ट्स आईं कि कई क्षेत्रों में यूजीसी के दिशा-निर्देशों का जवाब सामान्य वर्ग के लोगों ने दिया है। हालांकि, यह संभव है कि संघ प्रमुख का बयान राजस्थान के चुनाव परिणामों से सीधे तौर पर संबंधित न हो, लेकिन यह भाजपा और संघ दोनों के लिए चिंता का विषय है।
राजस्थान में हर पांच साल में सत्ता बदलती है, और भाजपा तथा कांग्रेस बारी-बारी से सरकार बनाते हैं। भाजपा को उम्मीद थी कि गुजरात और मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान को भी स्थायी गढ़ बनाया जा सकता है। लेकिन पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन राजस्थान में कमजोर रहा। भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से संघ और भाजपा दोनों को सरकार के कामकाज पर सकारात्मक फीडबैक नहीं मिला है। स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन ने सभी की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
आमतौर पर स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ दल जीतते हैं, लेकिन भाजपा को 4,179 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 3,600 से अधिक सीटें जीतकर उसे नजदीक से चुनौती दी। इसके अलावा, 2,200 से अधिक निर्दलीय पार्षद भी जीत गए। इतनी बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षदों की जीत को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। सीजेपी ने स्कूलों के मुद्दे को उठाकर एक नई ताकत के उभरने की संभावना को बढ़ा दिया है।