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राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर पर BCCI की कार्रवाई, मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर मांगा स्पष्टीकरण

राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर पर आईपीएल मैच के दौरान मोबाइल फोन का उपयोग करने के आरोप में BCCI ने कार्रवाई की है। यह मामला तब सामने आया जब भिंडर डगआउट में मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए कैमरे में कैद हो गए। BCCI की एंटी करप्शन यूनिट ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। भिंडर ने बीसीसीआई से विशेष अनुमति प्राप्त की थी, लेकिन अब उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने फोन का उपयोग किस उद्देश्य से किया। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

नई दिल्ली में आईपीएल विवाद

नई दिल्ली: आईपीएल मैच के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के कारण राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े हैं। डगआउट में मोबाइल फोन का उपयोग करने के मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है, जिसके चलते भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सख्त कदम उठाया है। बोर्ड की एंटी करप्शन और सुरक्षा यूनिट (ACSU) ने भिंडर को नोटिस जारी कर इस घटना पर स्पष्टीकरण मांगा है।


वायरल वीडियो ने बढ़ाई समस्या

यह विवाद 10 अप्रैल को गुवाहाटी में राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेले गए मैच से जुड़ा है। इस दौरान, भिंडर डगआउट में बैठकर मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए कैमरे में कैद हो गए थे। उनके बगल में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी भी फोन की स्क्रीन देख रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसके बाद बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था।


एंटी-करप्शन नियमों का उल्लंघन

बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए 13 अप्रैल को भिंडर को आधिकारिक नोटिस जारी किया। उन्हें 48 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करना होगा कि उन्होंने डगआउट में मोबाइल फोन का उपयोग क्यों किया। हालांकि, वीडियो में भिंडर किसी से बात करते हुए नहीं दिख रहे हैं, लेकिन डगआउट में फोन का उपयोग करना पीएमओए (प्लेयर्स एंड मैच ऑफिशियल्स एरिया) गाइडलाइन्स का उल्लंघन है। आईपीएल के नियमों के अनुसार, केवल टीम मैनेजर और सिक्योरिटी मैनेजर को फोन रखने की अनुमति होती है, और वह भी केवल ड्रेसिंग रूम तक सीमित है।


विशेष अनुमति का मामला

इस विवाद में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भिंडर ने बीसीसीआई से डगआउट में फोन रखने की विशेष अनुमति प्राप्त की थी। दरअसल, वह फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और आईसीयू में भी रह चुके थे। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने यह छूट मांगी थी। अब उन्हें यह साबित करना होगा कि उस समय फोन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था। उनके जवाब के आधार पर ही इस मामले का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।