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राजेश खुल्लर: हरियाणा के प्रभावशाली प्रशासक और साहित्यकार

राजेश खुल्लर, हरियाणा के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी, एक प्रभावशाली प्रशासक और साहित्यकार हैं। उन्होंने 'अपनी बेटी अपना धन' जैसी महत्वपूर्ण नीति बनाई, जो समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण को बदलने में सहायक रही। उनके प्रशासनिक अनुभव और साहित्यिक योगदान ने उन्हें एक संवेदनशील और दूरदर्शी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है। जानें उनके जीवन की अनकही कहानी और प्रशासन में उनके योगदान के बारे में।
 

राजेश खुल्लर का प्रशासनिक सफर

  • 1992 में राजेश खुल्लर ने बनाई थी पहली बड़ी नीति: ‘अपनी बेटी अपना धन’
  • हरियाणा की सत्ता के सबसे प्रभावशाली अफसर, संवेदनशील प्रशासक और साहित्यप्रेमी व्यक्तित्व की अनकही कहानी


चंडीगढ़(चंद्र शेखर धरणी)- हरियाणा सरकार में मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर केवल एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासन, नीति-निर्माण, संवेदनशीलता और समय प्रबंधन का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। सत्ता के व्यस्त गलियारों में सक्रिय रहने के बावजूद, वे अपने भीतर के साहित्यकार को जीवित रखते हैं। व्यस्त कार्यशैली के बीच से समय निकालकर कविताएं लिखना और जीवन को गहराई से देखना, उनके व्यक्तित्व का वह पहलू है जो उन्हें एक सामान्य नौकरशाह से अलग पहचान देता है।


राजेश खुल्लर ने लगभग 35 वर्षों के प्रशासनिक अनुभव में हरियाणा में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने शासन-प्रशासन की जटिलताओं को न केवल समझा है, बल्कि समाज के दर्द और बदलाव की जरूरतों को भी महसूस किया है। यही कारण है कि उन्हें एक संवेदनशील और दूरदर्शी प्रशासक के रूप में देखा जाता है। समय का सर्वोत्तम उपयोग कैसे किया जाए, यह राजेश खुल्लर से सीखा जा सकता है। उनकी कार्यशैली, अनुशासन और रचनात्मकता यह दर्शाती है कि समय का सही उपयोग ही किसी व्यक्ति को असाधारण बनाता है।


राजेश खुल्लर ने अपने प्रशासनिक अनुभवों को केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें साहित्य में भी रूपांतरित किया। उन्होंने ‘वायरल सत्य’ नामक एक उपन्यास लिखा, जो उनके आत्ममंथन का परिणाम है। यह रचना उस समय की है जब वे हरियाणा में एचआईवी प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे।


1992: जब एक युवा आईएएस अधिकारी ने बेटी बचाने की दिशा में सोच बदली


राजेश खुल्लर के प्रशासनिक जीवन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक वर्ष 1992 से जुड़ी है। उस समय वे एडीसी पानीपत के रूप में कार्यरत थे। हरियाणा में भ्रूण हत्या एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही थी।


एक संवेदनशील अधिकारी के रूप में यह दृश्य उन्हें भीतर तक विचलित करता था। तब, राजेश खुल्लर ने एक ऐसी नीति की रूपरेखा तैयार की, जिसने हरियाणा की सामाजिक सोच पर गहरा असर डाला। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पहली बार एक नीति दी —


‘अपनी बेटी अपना धन’


यह केवल एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि बेटियों के प्रति समाज के नजरिए को बदलने की दिशा में एक साहसिक पहल थी। इस नीति को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने न केवल पसंद किया, बल्कि इसे हरियाणा में लागू भी किया।


अंबाला से आईएएस तक: मेहनत, मेधा और अनुशासन की यात्रा


राजेश खुल्लर मूल रूप से अंबाला के निवासी हैं। उन्होंने एमएससी फिजिक्स की पढ़ाई की और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर आईएएस बने।


मानव जीवन को सरल शब्दों में समझने वाले प्रशासक


राजेश खुल्लर की सोच केवल प्रशासनिक फाइलों तक सीमित नहीं है। वे मानव जीवन को सरल और सहज शब्दों में समझते हैं।


सोशल मीडिया से दूरी, काम से निकटता


राजेश खुल्लर केवल व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूरी बनाए रखते हैं। उनका मानना है कि सोशल मीडिया का उपयोग नागरिकों को त्वरित सेवा देने के लिए होना चाहिए।


हरियाणा की सत्ता का सबसे प्रभावशाली नाम


हरियाणा की सत्ता के गलियारों में राजेश खुल्लर को सबसे अधिक प्रभावशाली और भरोसेमंद माना जाता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


सीएमओ की धुरी, सरकार की गति के सूत्रधार


राजेश खुल्लर को केवल एक वरिष्ठ नौकरशाह कहना उनके योगदान को छोटा कर देना होगा। वे मुख्यमंत्री कार्यालय की कार्यशैली के केंद्रीय स्तंभ माने जाते हैं।


मनोहर सरकार के सबसे भरोसेमंद अफसरों में रहे शामिल


राजेश खुल्लर लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की भरोसेमंद टीम का हिस्सा रहे हैं।