राज्यसभा में भ्रामक विज्ञापनों पर राघव चड्ढा का सवाल
भ्रामक विज्ञापनों का मुद्दा
भ्रामक विज्ञापन भारत में : आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान भ्रामक विज्ञापनों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत का उपभोक्ता बाजार 'गुमराह करने वाली ब्रांडिंग' और 'झूठे विज्ञापनों' की समस्या से ग्रस्त है। चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई उत्पादों में चीनी के घोल को फलों के जूस के रूप में बेचा जा रहा है, जिससे लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस समस्या को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
राज्यसभा में चड्ढा ने मंगलवार को कहा, "भारत का उपभोक्ता बाजार एक गंभीर समस्या का सामना कर रहा है, जिसे 'गुमराह करने वाली ब्रांडिंग' और 'झूठा विज्ञापन' कहा जाता है। जब हम फलों के जूस की बोतल खरीदते हैं, तो उस पर ताजे फलों की आकर्षक तस्वीर होती है। लेकिन पैकेजिंग के पीछे, छोटे अक्षरों में लिखा होता है कि यह केवल मार्केटिंग के लिए है। हमारे देश के उपभोक्ता, विशेषकर युवा, इन पेय पदार्थों को स्वास्थ्यवर्धक समझकर पीते हैं, जबकि असल में वे चीनी का घोल पी रहे होते हैं, जिससे उन्हें डायबिटीज, मोटापा और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ हो सकती हैं।"
चड्ढा ने सरकार से सीधे पूछा कि भ्रामक ब्रांडिंग और फर्जी विज्ञापनों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये बड़े फूड ब्रांड्स बच्चों को डायबिटीज की ओर धकेल रहे हैं और सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इससे पहले, चड्ढा ने इंटरनेट डेटा के मुद्दे को भी उठाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उपयोग न हुआ मोबाइल डेटा अगले महीने में ले जाने की अनुमति होनी चाहिए।