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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नए खुलासे: आरोपी का परिवार क्या कहता है?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अविनाश शुक्ल की गिरफ्तारी के बाद कई नए खुलासे हुए हैं। उसके परिवार का कहना है कि उसके कर्मों का फल भगवान देंगे। पुलिस ने मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा को और अधिक कड़ा कर दिया है। जानिए इस मामले में क्या कुछ नया सामने आया है और परिवार की क्या प्रतिक्रिया है।
 

अविनाश शुक्ल की गिरफ्तारी और परिवार की प्रतिक्रिया

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले की जांच में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ल, जो प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के नारियावा बाबूपुर गांव का निवासी है, के बारे में जानकारी मिली है कि वह 2025 में अयोध्या गया था। उसके बड़े भाई अभिषेक 2021 से अयोध्या में एक प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और अविनाश उनके साथ ही रहता था।


पुलिस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में लगातार छापेमारी की है, जिसमें अब तक 80 लाख रुपये की बरामदगी का दावा किया गया है। जांच कर रही एसआईटी ने अविनाश के कमरे से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ है और उस पर पेटीएम का QR कोड भी लगा हुआ है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।


अविनाश के परिवार का कहना है कि उसके कर्मों का फल भगवान देंगे। उसके पिता राम सजीवन शुक्ल और माता मिथिलेश के पांच बेटे हैं। तीन बेटे खेती करते हैं और एक डिस्पेंसरी चलाते हैं। परिवार के पास लगभग 14 बीघा जमीन है। अभिषेक, जो 2021 से अयोध्या में है, घर खर्च के लिए पैसे भेजता है। अविनाश जब घर आता था, तो वह भी कुछ पैसे देता था।


पिता ने बताया कि उनका पुराना कच्चा मकान है, जिसमें वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। वहीं, एक नया मकान भी है जिसमें उनके अन्य बेटे और बहुएं रहती हैं। पुलिस की जांच तेज हो गई है और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सभी आठ आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ल, जो कौशलपुरी के एक योग केंद्र में अपने भाई के साथ रहता था, 5 जून को चोरी का मामला खुलने के बाद पुलिस ने वहां छापेमारी कर 5 लाख रुपये नकद बरामद किए।


इस बीच, योग केंद्र से एक रहस्यमय बक्सा मिलने के बाद योगाभ्यासियों ने दोनों भाइयों को केंद्र से बाहर निकाल दिया। योगाचार्य सीमा तिवारी के अनुसार, अभिषेक पिछले 10 वर्षों से वहां रह रहा था और बाद में अविनाश को लाया था, जिसकी गतिविधियाँ संदिग्ध थीं। स्थानीय लोग और साधक आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। यह मामला तब खुला जब सीसीटीवी फुटेज और जांच में चढ़ावे की गिनती में गड़बड़ी पाई गई। मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने सुरक्षाकर्मी और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा और ऑडिट व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है।