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राम मंदिर चढ़ावे चोरी पर नृपेंद्र मिश्रा की गंभीर टिप्पणी

राम मंदिर चढ़ावे चोरी के मामले में पूर्व IAS नृपेंद्र मिश्रा ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा विश्वासघात है और प्रबंधन में बदलाव की आवश्यकता है। बैंक की लापरवाही और निगरानी में कमी के कारण श्रद्धालुओं का विश्वास प्रभावित हुआ है। SIT इस मामले की जांच कर रही है, जिसमें ट्रस्टी और बैंक के अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है।
 

अयोध्या में चढ़ावे की चोरी पर चिंता

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष पूर्व IAS नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा विश्वासघात है और मंदिर के प्रबंधन को पूरी तरह से बदलने की आवश्यकता है। बैंक की लापरवाही ने इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है।


प्रबंधन में पारदर्शिता की आवश्यकता

नृपेंद्र मिश्रा ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि चढ़ावे की चोरी का मामला जमीन खरीद विवाद से भी अधिक गंभीर है। उन्होंने कहा कि दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया था। यह घटना एक चेतावनी है कि यदि व्यवस्थाओं में पारदर्शिता नहीं होगी, तो समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।


बैंक की जिम्मेदारी पर सवाल

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना चाहिए था। बैंक को दान की गिनती और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषणों की रसीद भी नहीं है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।


निगरानी में कमी की पहचान

मिश्रा ने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल करना आवश्यक है। उन्होंने चंपत राय की निष्ठा की सराहना की, लेकिन निगरानी में कमी को गंभीरता से लिया। चढ़ावे में चोरी की घटनाओं की जांच के लिए SIT सक्रिय है और पिछले तीन वर्षों में दान की गई राशि की जानकारी भी जुटाई जा रही है।


SIT की जांच जारी

राम मंदिर चढ़ावे चोरी के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अयोध्या में लगातार पांचवें दिन जांच की। टीम ने मंदिर के ट्रस्टी और SBI के ब्रांच मैनेजर से पूछताछ की। इस दौरान, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र से चार घंटे तक बातचीत की गई, जिसमें दान की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।