राम मंदिर चढ़ावे चोरी मामले में बड़े बदलाव की संभावना
अयोध्या में चढ़ावे की चोरी की जांच
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और करोड़ों रुपये की बंदरबांट की जांच अब ट्रस्ट के उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि कुछ प्रमुख पदाधिकारी अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं, जबकि कुछ को मजबूरन हटाया जा सकता है। जांच में जुटी एसआईटी अब दान राशि की गणना और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि अकेले कुछ कर्मचारी दानपात्रों से निकली राशि में गड़बड़ी नहीं कर सकते। निश्चित रूप से इसमें कुछ बड़े नामों की मिलीभगत हो सकती है। इस समय निगरानी और जवाबदेही की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यही कारण है कि केवल राशि पार करने वालों पर ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस स्थिति में राम मंदिर की छवि को भी गंभीर नुकसान होता दिख रहा है।
संभावित विदाई के नाम
मंदिर की छवि को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। सूत्रों के अनुसार, इसमें जवाबदेही तय की जाएगी। इस क्रम में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों से जुड़े प्रमुख सहयोगी गोपाल राव समेत अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी ट्रस्ट से बाहर हो सकते हैं। ऐसा होने पर इसे एक सुधारात्मक कदम के रूप में पेश किया जाएगा। ट्रस्ट के भीतर और बाहर यह संदेश दिया जाएगा कि लापरवाही या निगरानी में कमी बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों।
एफआईआर की तैयारी
दान घोटाले की जांच के दौरान चंपत राय के करीबी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के अलावा दान राशि की गणना में शामिल अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की तैयारी पूरी हो गई है। सूत्रों के अनुसार, वित्तीय अनियमितताओं और राशि के गबन के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी। इसी क्रम में कुछ बैंक कर्मियों को भी रडार पर रखा गया है। एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा केवल दानपात्रों की राशि तक सीमित नहीं रखा है। टीम अब 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर परिसर में हुई नियुक्तियों, प्रशासनिक फैसलों और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा कर रही है।
मंदिर परिसर में तैनात कर्मचारी
मंदिर परिसर में इस समय लगभग 800 कर्मचारी विभिन्न व्यवस्थाओं में तैनात हैं, जिनमें करीब 200 कर्मचारी सीधे ट्रस्ट द्वारा नियुक्त किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि किन लोगों को किस प्रक्रिया के तहत नियुक्त किया गया और उन्हें कैसे जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इसके अलावा निगरानी व्यवस्था में कहां और कैसे चूक हुई? इसी क्रम में एसआईटी ने मंदिर परिसर में वर्षों से तैनात सुरक्षा अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों का पूरा ब्यौरा मांगा है।
प्रबंधन में संभावित बदलाव
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है। जांच की दिशा संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में मंदिर प्रबंधन, वित्तीय निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ट्रस्ट के भीतर जवाबदेही तय करने से लेकर दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल पूरे देश की नजर उस एसआईटी जांच पर टिकी है, जिसकी रिपोर्ट यह तय करेगी कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में आखिर जिम्मेदार कौन है और उसके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
17 साल से तैनात सुरक्षाकर्मी की भूमिका
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात सुरक्षा अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की पूरी सूची तलब कर ली है। इसी बीच सुरक्षा से जुड़े एक ऐसे कर्मी का नाम भी सामने आया है जो पिछले 17 वर्षों से मंदिर में तैनात है। इस पुराने कर्मी की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है। फिलहाल टीम सभी पुराने कर्मियों की तैनाती की अवधि, उनकी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जुटाने में लगी है।