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राम मंदिर चढ़ावे में घोटाले पर देवकीनंदन ठाकुर की कड़ी प्रतिक्रिया

कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घोटाले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सरकार इस मामले में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी। ठाकुर का मानना है कि भगवान राम को चढ़ाया गया धन केवल धन नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए। उन्होंने मंदिरों में सरकारी हस्तक्षेप पर भी आपत्ति जताई। जानें उनके विचार और इस मुद्दे पर उनकी मांगें।
 

घोटाले पर तीखी प्रतिक्रिया

धौलपुर (राजस्थान): कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित घोटाले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।


सरकार की भूमिका

मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए, ठाकुर ने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह स्पष्ट है कि देश में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सरकार सुनिश्चित करेगी कि उचित कार्रवाई हो।


धन का उपयोग

उन्होंने यह भी कहा कि कुंभ के दौरान सनातन बोर्ड के संबंध में काफी चर्चा हुई थी। जो लोग धर्म और शास्त्रों को समझते हैं, उनके लिए भगवान राम को चढ़ाया गया धन केवल धन नहीं, बल्कि ठाकुर जी का प्रसाद है। उनका मानना है कि यह प्रसाद गरीबों के कल्याण में उपयोग होना चाहिए।


सामाजिक कल्याण की दिशा

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि ठाकुर जी का प्रसाद सामाजिक कल्याण के लिए होना चाहिए, जैसे अस्पतालों और गौशालाओं का निर्माण। उन्होंने इस दिशा में अपनी बात रखी है।


सरकारी हस्तक्षेप पर आपत्ति

उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में किसी भी प्रकार की सरकारी नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। पहले ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, केवल धन की गिनती करने का कार्य नहीं होना चाहिए। यदि राम की संपत्ति का दुरुपयोग किया गया, तो इसके परिणाम गलत होंगे।


सनातन बोर्ड की मांग

16 जून को, देवकीनंदन ठाकुर ने मंदिरों के लिए 'सनातन बोर्ड' बनाने की मांग की थी। उन्होंने राम मंदिर दान पात्र विवाद पर शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति मंदिर के धन का दुरुपयोग करता है, उसे 60 हजार वर्षों तक कष्ट भोगना पड़ता है।